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बुजुर्गों को रखें याद तो वो भी नहीं भूलेंगे कोई बात

Monday, September 03, 2018 09:50 AM

अल्जाइमर्स दिवस पर दैनिक नवज्योति के आम्रपाली सर्किल स्थित कार्यालय में चर्चा करते अतिथि

जयपुर। दैनिक नवज्योति के आम्रपाली सर्किल स्थित कार्यालय में रविवार को अल्जाइमर्स दिवस के मौके पर इस बीमारी से पीड़ित पेशेंट की देखभाल कैसे करें  विषय पर परिचर्चा का आयोजन किया गया। आजकल यह बीमारी तकरीबन हर घर में हो रही है जिसमें उनकी याददाश्त कमजोर पड़ जाती है और हर चीज भूल जाते हैं। इस बात से बुजुर्ग खुद को अकेला महसूस करने लगते हैं और उनके अन्दर जिंदगी के प्रति कमजोर मानसिकता घर कर जाती है।

बच्चे बार बार उन्हें उस बात के बारे में याद दिलाते हैं तो बुजुर्गों को लगता है उम्रदराज लोगों की बीमारी हमें लग गई है। अकेलापन उन्हें घेर लेता है जिंदगी के प्रति नजरिया भी नकारात्मक होता जाता है और परिवार का साथ नहीं मिलने पर वह अकेले पड़ जाते हैं। इस परिचर्चा में गौतम हॉस्पिटल एण्ड रिसर्च सेंटर आॅफ बिहेवियरल साइंस इंस्टीटयूट के वरिष्ठ मनोचिकित्सक डॉ शिव गौतम, मनोचिकित्सक डॉ अनीता गौतम, चीफ डायटीशियन डॉ मेधावी गौतम, प्रोफेसर महारानी कॉलेज अल्पना कटेजा, समाजसेवी निर्मल गोयल, समाजसेवी पूनम खंगारोत।

फोर्टी वुमन विंग प्रेसिडेंट रानू श्रीवास्तव, शिक्षक खुशबू भाटिया, बिजनेसमैन एस एस शेखावत, सुनील नारनौलिया वैब सीरीज एक्सपर्ट,सिद्धम संस्थान फाउंडर प्रतिमा नाथानी,मिसेज इंडिया इंटरनेशनल दीप्ती सैनी ने एल्डरली केयर पर अपने-अपने सुझाव रखें ताकि बुजुर्गों की केयर करते हुए उनको एक तरह से हंसी खुशी वाला माहौल दिया जाए ताकि अल्जाइमर्स होने के बाद भी अच्छी केयर से उन्हें छुटकारा मिल जाए।


65 की उम्र के बाद होता है अल्जाइमर्स डिमेंशिया: डॉ शिव गौतम
मुख्य वक्ता वरिष्ठ मनोचिकित्सक डॉ शिव गौतम ने कहा पहले से एल्डरली हैल्थ स्टेटस भारत में और देशों के मुकाबले काफी अच्छा हो गया। इसकी वजह है अवेयरनैस हम ज्यादा स्प्रैड कर रहे हैं। विदेशों में स्थिति और भी खराब है। हमारे देश में पहले 50 की एज में लोगों को लगता था हम बूढ़े हो गए। ठीक से सुन नहीं सकते। आप यकीन मानिए 65 की उम्र में मैं 14 घंटे वर्क कर रहा हूं और एक फिट रहता हूं।

हमने एल्डरली केयर विषय पर बातचीत के लिए एक वाट्सएप ग्रुप बनाया है जहां अल्जाइमर्स पर लोगों से चर्चा करके इलाज की सभी जानकारियां,बीमारी से बचाव के तरीकों के बारे में समझाते हैं। ये रोग 65 एज के बाद ज्यादा होता है जिसे अल्जाइमर्स डिमेंशिया कहते हैं। 75 एजगु्रप वालों में 25 प्रतिशत इससे पीड़ित है, 85 एज गु्रप में 35 परसेंट को बीमारी होती है।

बड़ो को भूलने की बीमारी लग जाती है। कई परिवारों में केयर ढंग से नहीं मिल पाती। रसोईघर में जाना हो तो बाथरूम में चले जाते हैं इस तरह की प्रॉब्लम्स एल्डर्स को होती है। कहते हैं हंसता खेलता परिवार इंसान के लिए आॅक्सीजन की तरह है। परिवार साथ नहीं तो प्राणवायु कहां से मिलेगी। ये बातें हम सबको समझनी चाहिए। बुजुर्गों को ये बीमारी लगने के बाद कभी अकेला नहीं छोड़े उनकी अच्छी तरह से देखभाल करें।

क्वालिटी टाइम साथ में बिताने से अल्जाइमर ठीक हो जाता है। डॉ गौतम ने उदाहरण दिया यदि एज का ही फर्क होता तो देश के फ्लाइंग सिख मिल्खा सिंह, बॉलीवुड के महानायक अमिताभ बच्चन और रतन टाटा जैसी शख्सियत ना होती। ये बात नहीं है कि एज फैक्टर की वजह से होता है। मनोचिकित्सक डॉ शिव गौतम ने अल्जाइमर्स रोग से बचने के लिए कुछ सुझाव भी दिए।
-    एल्डर्स की याददाश्त अच्छी करने के लिए सुडौक,पहेली भरने,शतरंज खेलने जैसी एक्टिविटीज कराएं
   फिट रहने के लिए हल्की एक्सरसाइज कराए
-    परिवार के सभी मेम्बर्स अच्छे पलों को साथ में शेयर करें बॉन्डिंग मजबूत हो
   अल्जाइमर होने पर अकेला नहीं छोड़े अपना टाइम इस तरह से सैट रखें फैमिली मेम्बर्स

खान-पान का रखें ध्यान
आजकल ओल्डएज होम बहुत चल रहे हैं मगर हमें ध्यान रखना होगा एल्डरली लोगों को न्यूट्रीशियन्स से भरपूर खाना मिल रहा है या नहीं। इस एजगु्रप में खान-पान के तौर तरीके बदल जाते हैं। एक्टिव रहने के लिए घूमना फिरना, हल्का भोजन पौष्टिक चीजों वाला उनको देना जरूरी होता है।

बहुत सी फैमिलीज में वर्किंग आवर्स के कारण ठंडा खाना पड़ता है ये सहीं नहीं है। क्योंकि ओल्डएज होने पर डाइट जो एल्डर्स ले रहे हैं उसमें खामियां आ जाती है। ये उनकी मैंटल एबिलिटी को इफैक्ट करती है इसलिए परिवार के लोग केयर करके अच्छा खाना खिलाएं
-डॉ मेधावी गौतम, चीफ डायटीशियन

उनकी समस्याएं सुनें
ओल्डएज लोगों में हार्मोन चेंजेस आने के कारण यूथ दूर हो जाता है। ऐसा नहीं होना चाहिए। बल्कि हमें उनकी समस्या को सुनकर दूर करना चाहिए। स्कूल, कॉलेज लेवल पर यंग जनरेशन को ओल्डएज में लेडिज में होने वाले मैनोपॉज आदि के बारे में अवेयर करना जरूरी है।

ताकि वो बड़ों की सेवा कर पाएं। यूथ को इनके बारे में कम पता होता है। बच्चों की झिझक खोलने के लिए पेरेंटस उनसे बातचीत करें क्योंकि अल्जाइमर्स पेशेंट कई बार बात को बार बार सोचकर भी और भी चिंतित हो जाते हैं कि कौन हमारी सेवा करेगा। अकेलेपन के कारण भी ये बीमारी बढ़ती है इसलिए कोई ना कोई एक्टिविटी ऐसी करती है जिसमें सभी फैमिली मेम्बर्स एक साथ शामिल हो।
-डॉ अनीता गौतम मनोचिकित्सक

समय रहते अवेयर करने की जरुरत
यह एक ऐसी बीमारी है। जिससे व्यक्ति की याददाश्त कमजोर पड़ने लग जाती है। छोटी-छोटी बातें भूलने लग जाते हैं। इसलिए खासकर बुजुर्गों को घर में पारिवारिक माहौल देने की जरुरत है। वहीं इस बीमारी के सचेत रहने के लिए स्कूल, कॉलेजों में सेमिनार आयोजित किए जाने चाहिए। ताकि बच्चों को छोटे से ही इसके लिए अवेयर किया जा सके। बुजुर्गों को समाज में आयोजित कई एक्टिविटीज में शामिल करना चाहिए। ताकि उनमें एक्टिवनेस बनी रहे।
पूनम खंगारौत, समाजसेवी

बुजुर्गों को मुख्यधारा से जोडे रखें
अल्जाइमर के पीड़ित को समाज की मुख्यधारा से जोड़े रखने के लिए किसी ना किसी एक्टिविटी से जोड़े रखना होगा।  घर में बुजुर्गों को घर में कभी अकेलापन महसूस ना होने दें। इन बीमारी के प्रति अवेयर करने के लिए महारानी कॉलेज में समय-समय पर वर्कशॉप आयोजित की जाती है। जिसमें बुजुर्ग लोगों की सेवा करना और उनको महत्व देने की बात बताई जाती है।
प्रो.अल्पना कटेजा, प्रिंसिपल, महारानी कॉलेज

यंगस्टर रोजगार जुटाकर बुजुर्गों से जुडे
सामाजिक ग्रुप बनाकर या रोजगार के साधन उपलब्ध कराकर कई ग्रुप्स बुजुर्गों के समय का सदुपयोग कर रहे हैं। इस तरह के कामों से उनका टाइम पास होता है साथ में क्रिएटिव चीजें करने को मिलती है। एक गु्रप शहर में बुजुर्ग महिलाओं के अनुभव को काम ल्में लेकर बड़ी पापड़ अचार आदि बनवाकर बेचता है। नई पीढ़ी को पुराना स्वाद मिलता है जिसकी वजह से वह घर के खाने को मिस करते हैं। बुजुर्गों को कंपनी मिल जाती है दिनभर बातचीत करके वह छोटा मोटा काम कर लेते हैं  और अच्छे से अपना जीवन गुजारते हैं।

मेरे कहने का उद्देश्य यहीं है कि यंगस्टर इस तरह का कुछ करके बुजुर्गों से जुडेंगे तो उनका अकेलापन दूर होगा। दूसरा एल्डरली लोगों की एक फोन डायरेक्ट्री नाम पते नम्बर्स सहित तैयार कराकर उनसे बातचीत करें। उनको मुख्यधारा में लाने के कुछ प्रयास किए जाए तो बेहतर होगा।
-निर्मल गोयल समाजसेवी

डिजिटल माध्यम से भी करें अवेयर
आजकल अल्जाइमर की बीमारी तेजी से बढ़ रही है। इससे बचने के लिए खासकर यूथ के लिए मोटिवेशनल सेशन और वर्कशॉप आयोजित की जानी चाहिए। क्योंकि देखने में आ रहा है कि यूथ पर काम का इतना बोझ रहता है कि वह अच्छे से कुछ याद ही नहीं रख पाते। इसलिए डिजिटल प्लेटफॉर्म में वीडियोज अपलोड़ करके भी लोगों को इस बीमारी से बचने के लिए अवेयर किया जा सकता है।
कोमल चौहान, इवेंट मैनेजर

बुजुर्गों को दें पारिवारिक माहौल
रुरल इलाकों में इस बीमारी के प्रति अवेयर करने की ज्यादा जरुरत है। वहां इस बीमारी की ज्यादा प्रॉब्लम्स देखने को मिलती है। इसलिए ऐसे लोगों को आईडेंटिफाई कर उनके घर में बाकि सदस्यों को उनकी देखभाल करने की लिए गाइड करना चाहिए। बुजुर्गों में यह बीमारी ज्यादा ही देखने को मिल रही है। इसलिए बुजुर्गों को घर में पारिवारिक देने की जरुरत है। ताकि वें घर में अपने को अकेला महसूस ना करें।
एस.एस.शेखावत, बिजनसमैन

यूथ एल्डर्स की सोच को बदले
मेरे घर में भी अल्जाइमर्स की पेशेंट है। यूथ को चाहिए उनके साथ टाइम स्पेंड करें। उन्हें समझाए कि आप ही के कारण हमारा परिवार है। आपकी छांव तले हम इस वटवृक्ष के नीचे रहते हैं। बिना आप के हमारा कोई वजूद नहीं है इसलिए आप खुश रहेंगे तो हमें भी हिम्मत मिलेगी। बाहर घुमाने फिराने ले जाए। साथ बैठकर छोटी छोटी बातों को शेयर करें। इस तरह से अल्जाइमर्स पेशेंट का उत्साह बढ़ाएंगे तो निश्चित रूप से परिस्थितियों में बदलाव आएगा।
- प्रतिमा नाथानी, फाउंडर सिद्धम एनजीओ

बच्चों को  भी करें अवेयर
बच्चों को सोशल रैस्पॉन्सिबल बनाने के लिए मैं काम कर रहा हैं जिसमें 3 साल से लेकर 6 साल तक के बच्चों को हमने घर के बुजुर्गों से जुड़ने के लिए छह स्टैप्स बताएं है जिसमें अपने ग्रांड पेरेन्टस के साथ कम्पलसरी 20 घंटे बिताने के लिए कहा है। हम चाहते हैं बच्चे कैरियर में आगे बढ़ने के साथ साथ अपने ग्रांड पेरेन्टस व पेरेन्टस की केयर करें। इस मुहिम में जयपुर के विभिन्न स्कूलों में जाकर डेढ से दो लाख बच्चों को जोड़ेंगे। 10 हजार हमसे जुड़ चुके हैं।
- सुनील नारनौलिया, सोशल वर्कर

कॉलेजों में हो मोटिवेशन सेशन
अल्जाइमर बीमारी के प्रति जागरुक करने के लिए स्कूल, कॉलेजों आदि में मोटिवेशनल वर्कशॉप आयोजित करने की जरुरत है। काउंसलिंग कैम्प, फिजिकल एक्टिविटीज कराई जानी चाहिए। ताकि बच्चों को स्कूल स्तर से ही इस बीमारी से बचे रहने के लिए अवेयर किया जा सके। वहीं घर में दादा-दादी की देखभाल कैसे की जाए। इसके लिए भी स्कूलों में बच्चों के लिए वर्कशॉप आयोजित हो। क्योंकि बच्चे ही इनके ज्यादा करीब होते हैं।
-खुशबू, भाटिया

 फैशन शोज से करें अवेयर
मेरा मानना है कि लोगों को अल्जाइमर की बीमारी के प्रति अवेयर करने के लिए टीवी शो, मोटिवेशनल सेशन, वर्कशॉप आदि कार्यक्रम आयोजित करने के साथ ही फैशन शोज के माध्यम से भी इस बीमारी से अवेयर रहने की अपील की जा सकती है। इस बीमारी से पीड़ित बुजुर्गों का खास ध्यान रखने की जरुरत है। उन्हें कभी अकेलापन महसूस ना होने दें। इसलिए स्कूल, कॉलेजों में अल्जाइमर बीमारी से बचाव के लिए वर्कशॉप आयोजित की जानी चाहिए।
दीप्ति सैनी, मिस इंडिया इंटरनेशनल

60 प्लस भी ग्रुप में शामिल
यंग और 60 प्लस की लेडिज का हमारा गु्रप बना हुआ है जो कई तरह की सोशल एक्टिविटीज जैसे डांस, स्विमिंग, एनजीओ के माध्यम से गरीब बच्चों, वृद्धों की सेवा करके खुश होते हैं। मैं एक वृद्धाश्रम में जाकर सीनियर सिटीजन्स का बर्थडे हर साल सैलिब्रेट करती हूं। खुश रखने के लिए हमारा क्लब मेडिसिन डोनेट करता है। किसी अच्छी जगह पर पिकनिक के लिए जाते हैं। सब हंसते है गाते हैं डांस करके खूब मजा आता है।
-कनू मेहता, सोशलवर्कर

लेडिज प्रॉब्लम्स से भी रहे अवेयर
कुछ महिलाएं पीरियडस को लेकर इतना कुछ सोच लेती है कि कम्यूनिटी हॉल्स में नहीं जाती है। यह भी बीमारी का एक कारण हो सकता है कि महिलाओं से संबंधित बीमारियों पर बातचीत करने में लोगों को झिझक होती है। ये झिझक खत्म होनी चाहिए। ऐसी बातों के लिए घरों में आॅफिस में समझ बढ़ाने की बहुत आवश्यकता है। इसलिए अपनी झिझक समाप्त कर मीडिया  के जरिए इन बातों के लिए अधिक से अधिक अवेयरनैस फैलाएं
रानू श्रीवास्तव, फोर्टी चेयरमैन वुमन विंग

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