जानिए, मकर संक्रांति पर सूर्य की धूप से शरीर को क्या लाभ मिलता है? - Dainik Navajyoti
Dainik Navajyoti Logo
Thursday 17th of January 2019
Home   >  Special news   >   News
खास खबरें

जानिए, मकर संक्रांति पर सूर्य की धूप से शरीर को क्या लाभ मिलता है?

Friday, January 11, 2019 12:30 PM

मकर संक्रांति से पूर्व पतंगबाजी करते हुए शहरवासी ।

कोटा। भारत में हर त्यौहार का अपना सांस्कृतिक और सामाजिक महत्व है। ये त्यौहार  धार्मिक के साथ वैज्ञानिक महत्व भी रखते हैं। इन त्यौहारों के अवसर पर तैयार किए जाने वाले व्यंजनों का चिकित्सकीय महत्व भी जुड़ा होता है। मकर संक्रांति हिंदू धर्म के बड़े पर्व में से एक है। नए साल की शुरुआत का सबसे पहला त्यौहार होता है। भारतीय परंपरा के अनुसार के इस दिन स्नान और दान का अपना महत्व है। मकर संक्रांति से ही पृथ्वी पर शुभ और सुहाने दिनों की शुरुआत होती है।

देशभर में इस दिन लोग गंगा और अन्य नदियों में स्नान करते हैं और तिल आदि का दान करते हैं। मकर संक्रांति के दिन तिल-गुड़ खाने का अपना महत्व है। खास तौर से तिल-गुड़ के पकवान बनाने, खाने और दान की प्रथा पौराणिक काल से चली आ रही है, क्योंकि इस दिन से सूर्य धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश करता है। इस पर्व को देश में कई नामों से जाना जाता है जैसे बिहार में खिचड़ी, तमिलनाडु में पोंगल, आंध्रप्रदेश, कर्नाटक व केरल में यह पर्व केवल संक्रान्ति, असम में बिहू। मकर संक्राति के दिन पतंग उड़ाने की भी परंपरा है। इन दिनों बाजार में कई तरह की पतंग बिकती नजर आ रही है।  मान्यता है कि पतंग खुशी, उल्लास, आजादी और शुभ संदेश की वाहक है।

संक्रांति के दिन से घर में सारे शुभ काम शुरू हो जाते हैं और वो शुभ काम पतंग की तरह ही सुंदर, निर्मल और उच्च कोटि के हों, इसलिए पतंग उड़ाने की धारणा जुड़ी हुई है।  दिनभर धूप में लोग भले ही पतंग उड़ाने का आनंद लेते हैं, लेकिन वह इस बात से अनजान होते हैं कि इस दिन सूर्य से मिलने वाली धूप उनके शरीर को क्या-क्या फायदा दे रही है। कहा जाता है कि सर्दियों में हमारा शरीर खांसी, जुकाम और अन्य कई संक्रमण से प्रभावित होता है। इस दिन सूर्य उत्तरायण में होता है, उस समय उससे निकलने वाली सूर्य की किरणें शरीर के लिए औषधि का काम करती है। इससे शरीर स्वस्थ रहता है और शरीर को लगातार सूर्य से सेंक मिलता है। पहले  इस दिन गिल्ली-डंडा और सितोलिया भी खेला जाता था। पर अब ये परंपरा शहर में तो खत्म हो गई है। वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में भी ये दोनों खेल सिमट गए है। 

 
मकर संक्रांति का महत्व 
मकर राशि में सूर्य का प्रवेश धार्मिक दृष्टि से अत्यन्त फलदायक है। शास्त्रों के अनुसार, दक्षिणायण को देवताओं की रात्रि अर्थात नकारात्मकता का प्रतीक तथा उत्तरायण को देवताओं का दिन अर्थात सकारात्मकता का प्रतीक माना गया है। इसीलिए इस दिन जप, तप, दान, स्नान, श्राद्ध, तर्पण आदि धार्मिक क्रियाकलापों का विशेष महत्व है। ऐसी धारणा है कि इस अवसर पर दिया गया दान सौ गुना बढ़कर पुन: प्राप्त होता है। इस दिन शुद्ध घी एवं कम्बल का दान मोक्ष की प्राप्ति करवाता है।
 
धार्मिक महत्व 
-मकर संक्रांति के दिन भगवान सूर्य अपने पुत्र शनि से मिलने स्वयं उसके घर जाते हैं।
-द्वापर युग में महाभारत युद्ध के समय भीष्म पितामह ने अपनी देह त्यागने के लिए मकर संक्रांति के दिन को ही चुना था।
-इसी दिन भागीरथ के तप के कारण गंगा नदी के रूप में पृथ्वी पर आईं थीं और राजा सगर सहित भगीरथ के पूर्वजों को तृप्त किया था।
-इस दिन से रात छोटी और दिन बड़े होने लगते हैं। दिन बड़ा होने से सूर्य की रोशनी अधिक होगी और रात छोटी होने से अंधकार कम होगा। इसलिए मकर संक्रांति पर सूर्य की राशि में हुए परिवर्तन को अंधकार से प्रकाश की ओर अग्रसर होना माना जाता है।
-एक अन्य पुराण के अनुसार गंगा को धरती पर लाने वाले महाराज भगीरथ ने अपने पूर्वजों के लिए इस दिन तर्पण किया था। उनका तर्पण स्वीकार करने के बाद इस दिन गंगा समुद्र में जाकर मिल गई थी। इसलिए मकर संक्रांति पर गंगा सागर में मेला लगता है।
 
 वैज्ञानिक पहलू
-मकर संक्रांति के समय नदियों में वाष्पन क्रिया होती है। इससे तमाम तरह के रोग दूर हो सकते हैं। इसलिए इस दिन नदियों में स्नान करने का महत्व बहुत है।
 
-मकर संक्रांति में उत्तर भारत में ठंड का समय रहता है। ऐसे में तिल-गुड़ का सेवन करने के बारे में विज्ञान भी कहता है। ऐसा करने पर शरीर को ऊर्जा मिलती है। जो सर्दी में शरीर की सुरक्षा के लिए मदद करता है।
 
-इस दिन खिचड़ी का सेवन करने के पीछे भी वैज्ञानिक कारण है। खिचड़ी पाचन को दुरुस्त रखती है। यह शरीर को रोग-प्रतिरोधक बैक्टीरिया से लड़ने में मदद करती है।
 
-पुराण और विज्ञान दोनों में सूर्य की उत्तरायण स्थिति का अधिक महत्व है। सूर्य के उत्तरायण होने पर दिन बड़ा होता है इससे मनुष्य की कार्य क्षमता में वृद्धि होती है। मानव प्रगति की ओर अग्रसर होता है। प्रकाश में वृद्धि के कारण मनुष्य की शक्ति में वृद्धि होती है।
 
दैनिक नवज्योति ने मकर संक्रांति पर्व के अवसर पर शहर के प्रबुद्धजनों से यह जाना कि उनके लिए इस पर्व का क्या महत्व है। कैसे वह इस पर्व को मनाते है।
 
केंद्रीय कारागृह कोटा की जेल अधीक्षक सुमन मालीवाल ने बताया लंबे समय तक मेरी जयपुर में  पोस्टिंग  रही है। मकर संक्रांति पर्व पर मेरा बच्चा जयपुर जाता है। मैं भी उसे कंपनी देती हूं। बच्चे के साथ जयपुर जाती हूं तो वहां की मकर संक्रांति एन्जॉय करते है। छत पर जाकर पतंग उड़ाना। परिवार के साथ पकौड़े खाना। इसीमें दिन निकल जाता है। मकर संक्रांति दान-पुण्य का पर्व माना जाता है। हम कोई भी त्यौहार एक दिन पहले मनाना शुरू करते है। खास त्यौहार के दिन स्टाफ को भी थोड़ा फ्री रखते है जिससे कि वह भी परिवार के साथ त्यौहार मना सके। इस तरह 2-3 दिन तक पर्व कन्टीन्यू रहता है जेल में जितनी भी महिला बंदी होती है उनको व उनके बच्चों को लड्डू के साथ गर्म वस्त्र देती हूं। मेरे पास इतना स्कोप है कि किसी भी व्यक्ति के लिए अगर कुछ करना है तो ये लोग है। मुझे बाहर की जरुरत नहीं है। पिछले साल मैं भीलवाड़ा में थी। वहां पिछले दो साल से दो टीम बनती थी। एक जेल प्रशासन की टीम और एक बंदियों की टीम। मकर संक्रांति पर हम लोग एक बार क्रिकेट खेले और एक बार सतोलिया खेला। ढाई-तीन घंटे तक खेलते थे। सभी को तिल के लड्डू बांटते। लड्डू खाना और खेलना। इस तरह यह पर्व मनाती हूं।
 
 
आईजी कार्यालय में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अपराध एवं सतर्कता उमा शर्मा का कहना है इंडियन माइथोलॉजी में मकर संक्रांति का बहुत महत्व है। मलमास का समाप्ति और सूर्य संक्रांति का काल है। सूर्य का उत्तरायण है चूंकि मैं आध्यात्मवादी हूं। दान-पुण्य का इस दिन बहुत महत्व है। गरीबों और जरुरतमंदों को अपनी श्रद्घा व सामर्थ्य के अनुसार दान देने। बच्चों के लिए पतंगबाजी और तिल-गुड़ से बनी मिठाइयां खाने का रिवाज है। राजस्थान के ग्र्रामीण क्षेत्रों में इस दिन बहन-बेटी, पीहर जाने का रिवाज है। जहां वह अपनी पुरानी सखियों, परिजनों से मिलती है। इस दिन से शादियों की शुरुआत होती है। शहनाइयां बजने लगती है मैं इसे सूर्य आराधना का पर्व मानती हूं। आध्यात्म की दृष्टि से देखे तो सूर्य-चन्द्रमा ही देवता के रूप में भौतिक रूप से दिखाई देते है। बाकी देवताओं को तो देखा नहीं है सूर्य-चन्द्रमा को अस्तित्व का साक्षी मानते है। प्रतिदिन ही मैं सूर्य को अर्घ्य देती हूं। आदित्य स्त्रोत का पाठ करती हूं।  व्यस्तता के बावजूद यह सब इसलिए मैनेज हो जाता है क्योंकि सुबह पांच बजे उठना मेरी रुटीन लाइफ में शामिल है।

नगर निगम उपायुक्त श्वेता फगेड़िया का कहना है इस दिन सूर्य के मकर राशि में प्रवेश करने के कारण इसे मकर संक्रांति कहा जाता है। इस दिन का महत्व तो पौराणिक काल से चला आ रहा है। दान-पुण्य की प्राचीन परंपरा है। इस दिन का जिला कलक्टर ने स्थानीय अवकाश घोषित कर रखा है। अवकाश होने के कारण परिवार के साथ त्यौहार का आनंद भी लेगें और दान-पुण्य भी करेगें।
 
 
मोड़क में मंगलम महिला मंडल वेलफेयर सोसायटी की अध्यक्ष सुशीला जैन का कहना है मकर  संक्रांति का त्यौहार हर्षोल्लास से मनाते है। इस दिन दान-पुण्य का महत्व है। आध्यात्म और समाज सेवा करने में मेरी रुचि शुरू से ही है। जो भी जरुरतमंद होते है उन्हें अपनी वेलफेयर सोसायटी के माध्यम से उनको सालभर देते है।  संक्रांति पर दान का विशेष तौर पर महत्व है। इस दिन आसपास के क्षेत्र के लोगों को इंतजार होता है हम कलेक्शन अपने कैम्पस से ही करते है और उन्हें तिल के लड्डू, शॉल, कार्डिगन, स्वेटर, कंबल बांटते है। वैलफेयर के जरिए तो करते ही है लेकिन स्वयं भी निजी तौर पर जरुरतमंद को अपनी तरफ से देती हूं।
 
 
एडीएम सिटी पंकज ओझा का कहना है  मकर संक्रांति पर तिल, गुड़ सेवन से प्रोटीन, कैल्शियम, बी-कॉम्पलैक्स कार्बोहाड्रेट, एन्टीआॅक्सीडेन्ट की प्राप्ति होती है, इससे हेल्थ बेनिफिट बढ़ जाते है। तिल का लड्डू उदर विकार दूर कर खून की सफाई कर बी.पी कन्ट्रोल करता है। देवताओं का प्रभात काल होने से मकर संक्रांति पर किया गया दान 100 गुना हो जाता है। भविष्य पुराण मे महर्षि वेदव्यास के अनुसार संक्रांति के दिन स्नान, तर्पण, दान से ब्रम्हलोक की प्राप्ति होती है एवं त्वचा, उदर, नैत्र, शरीर के रोगों से मुक्ति मिलती है और शरीर निर्मल हो जाता है। इस दिन पतंग उड़ाने का वैज्ञानिक महत्व यह है कि इसी दिन भगवान सूर्य की किरणों की तेजी बढ़ने लगता है जो रक्त और हड्डियों हेतु लाभदायक है। मकर संक्रांति पर तिल का दान शनि, धार्मिक पुस्तक एवं पंचाग का दान गुड़ गुरू, हरा चारा बुध, गुड़ का दान मंगल, दूध का दान चंद्रमा आदि ग्रहो का दान है जो अत्यन्त लाभकारी है।
 
स्टार किड्स स्कूल के डायरेक्टर अंकित मिश्रा का कहना है मकर संक्रांति हिन्दू संस्कृति का महत्वपूर्ण त्यौहार है। इस दिन को नव वर्ष के लिए भी सेलिब्रेट करते है। नए साल का पहला त्यौहार होता है। छोटे-छोटे बच्चे जो भावी पीढ़ी है, उन्हें तिल के लड्डू खिलाकर नए साल की विश करते है। उन्हें अपनी संस्कृति से जोड़कर रखते है। तिल-गुड़ को इस दिन खाने का कारण देखे तो वह आयुर्वेद से जुड़ा है। सर्दी में तिल-गुड़ के लड्डू खाने से वह दवाई का काम करते है तिल-गुड़ की तासीर गर्म होती है। जितने भी पर्व है उनके पीछे कोई ना कोई तर्क जरूर है जिन्हें हम त्यौहारों के माध्यम से मनाते है।
 
एसएन पारीक हॉस्पिटल में जनरल फिजिशियन डॉ. कपिल भोला का कहना है तिल व गुड़ मकर  संक्रांति पर ही खाए जाए ऐसा नहीं है। पूरे शीतकाल में इनका सेवन महत्व रखता है। तिल-गुड़ गर्म होते है इन्हें खाने से शरीर गर्म रहता है शरीर को ऊर्जा मिलती है। तिल व गुड़ के अनेक फायदे है। गुड़ एसिडिटी, गैस को कम करता है। स्मरण शक्ति बढ़ाता है। तिल में ओमेगा-3 फैटी एसिड की मात्रा बहुत होती है। तिल में फाइबर होते है इसका सेवन जोड़ों के दर्द, घुटने के दर्द में लाभदायक है मसल्स के लिए अच्छा होता है यही कारण है कि मकर  संक्रांति के अवसर पर गुड़-तिल के व्यंजन प्रमुखता से दान किए व खाए जाते है।
 
ज्योतिषाचार्य पं. संजय चतुर्वेदी का कहना है दान का ही सबसे ज्यादा महत्व है। सूर्य गुरु की राशि से हटकर शानि की राशि मकर में प्रवेश करता है। मकर राशि सूर्य की शत्रु राशि होती है। शनि का दान यानि तिल, गुड़, उड़द, कंबल, लोहे के पात्र ये दान करना ठीक रहता है। सूर्य समय का अधिष्ठात्री देवता है। पंचाग या कलेंडर, घड़ी यानी समय व दिनों से संबंधित चीजें दान करना चाहिए। 14 जनवरी को मकर राशि में सूर्य का प्रवेश शाम 7.28 मिनट को होगा। रात्रि में दान नहीं करते। इसलिए पुण्यकाल 15 जनवरी को माना जाएगा। दान किसी को भी कर सकते है लेकिन जरूरतमंदों को ही दान करें तो अच्छा है। मकर संक्रान्ति का वैज्ञानिक दृष्टिकोण यदि देखे तो हमारे यहां मकर रेखा से सूर्य प्रवेश करता है तो गर्मी बढ़ती है। दिन बड़े होने लगते है। कर्क रेखा में जब सूर्य जाता है सर्दी बढ़ती है और दिन छोटे होते है सूर्य के उत्तरायण होने से वातावरण में गर्मी बढ़ने और दिन बड़े हो जाते है इस दिन तिल का वैज्ञानिक महत्व है कि एक तो तिल पौष्टिकता देने वाला है शारीरिक दृष्टि से देखे तो तिल गुड़ को सर्दी में ग्र्रहण करना व्यावहारिक तौर पर उचित है।

Other Latest News of Special-news -

टूरिस्ट तीज, गणगौर और स्वागत होटल से भी बुक होंगे सिटी टूर पैकेज

आरटीडीसी के होटल तीज, गणगौर और स्वागत होटल से देशी-विदेशी पर्यटक विभाग की ओर से चलाए जाने वाले सिटी टूर पैकेज बुक करा सकते हैं।

17 Jan 12:50 PM

बॉलीवुड सितारों ने पीएम मोदी के साथ की मीटिंग, ली सेल्फी

रणवीर सिंह, रणबीर कपूर, आलिया भट्‌ट, वरुण धवन सहित कई बॉलीवुड सितारों ने पीएम मोदी से मुलाकात की। पीएम मोदी ने भारतीय संस्कृति पर

11 Jan 16:15 PM

नहीं थे प्रोटीन व डाइट के पैसे, 12 किमी रोज दौड़कर बनाई बॉडी

हिम्मत ए मर्दा तो मदद ए खुदा.... इस कहावत को चरितार्थ करते हुए युवा बॉडी बिल्डर हासिम अंसारी ने अपने परिवार की आर्थिक तंगी के चलते मजबूत इरादों और कठिन मेहनत से मुश्किल राह को भी आसान बना डाला।

09 Jan 10:45 AM

रेलवे स्टशनों पर होगी एयरपोर्ट की तरह कड़ी सुरक्षा, यात्रियों को जल्दी पहुंचना होगा

भारतीय रेलवे अब स्टशनों पर एयरपोर्ट की तरह सिक्योरिटी चैक की व्यवस्था करने जा रहा है। इसके तहत स्टेशनों पर ट्रेनों के तय प्रस्थान समय से कुछ समय पहले प्रवेश की अनुमति बंद की जा सकती है।

08 Jan 14:45 PM

देखने और सुनने की जबरदस्त ताकत होती है टाइगर में

हम इस स्तंभ में पहले भी लिख चुके हैं कि आज से 80-90 साल पहले तक जयपुर के आसपास वन्यजीवों की बहुतायात थी। इन वन्यजीवों

07 Jan 11:40 AM