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क्या ‘बिम्सटेक’ एशिया में छा जाएगा?

Saturday, September 08, 2018 08:35 AM

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी

हाल के वर्षों में सारे संसार में विभिन्न देशों में यह प्रवृति पाई गई है कि क्षेत्रीय देश मिलजुल कर अपनी आर्थिक, सामाजिक और राजनीतिक समस्याओं का समाधान करें। इसी सिलसिले में कुछ वर्ष पहले ‘सार्क’ का गठन हुआ था जिसमें दक्षिण एशिया के देश मिलजुल कर अपनी समस्याओं का समाधान करने का प्रयास कर रहे थे। परन्तु पाकिस्तान की हठधर्मी के कारण ‘सार्क’ आगे बढ़ नहीं सका।

पाकिस्तान की झगडालु नीति के कारण ‘सार्क’ की हर बैठक में पाकिस्तान ने कश्मीर का मुद्दा उठाया और भारत के लाख मना करने के बाद भी पाकिस्तान ने आतंकवादियों का साथ नहीं छोड़ा और आज तक जम्मू कश्मीर में पाकिस्तान आतंकवादियों की हर तरह से मदद कर रहा है। आतंकियों को खतरनाक हथियार मुहैया करवा रहा है और आर्थिक मदद भी दे रहा है। इसलिए तंग आकर भारत ने फैसला किया कि पिछली बार जब पाकिस्तान में ‘सार्क’ की बैठक हुई तो वह उसमें भाग नहीं लेगा।

पिछले अनेक वर्षों से पाकिस्तान भारत के खिलाफ आतंकवादियों को सह दे रहा है। जब पानी सिर के उपर से निकल गया तब कुछ वर्ष पहले भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री इन्दर कुमार गुजराल ने कहा कि अब पाकिस्तान के साथ चलना मुश्किल है और उन्होंने 1977 में ‘गुजराल डॉक्टरिन’ की बात कही जिसमें कहा गया है कि अब पाकिस्तान को अपने साथ लेकर चलना नामुमकिन है।

इसलिए बंगाल की खाड़ी के तटवर्तीय या समीप के देशों का एक संगठन बनाया जाएगा। इस संगठन का नाम ‘बिम्सटेक’ पड़ा। इस संगठन में भारत, बांग्लादेश, म्यामार, श्रीलंका, थाईलैंड, भूटान और नेपाल शामिल हैं। इस संगठन में सार्क देशों के लगभग डेढ़ अरब लोगों की आबादी है जो संसार की करीब 25 फीसदी आबादी हो जाती है। अभी हाल में नेपाल की राजधानी काठमांडु में ‘बिम्सटेक’ की महत्वपूर्ण बैठक हुई जिसमें कहा गया कि यह संगठन दक्षिण एशिया और दक्षिण-पूर्व के देशों को आपस में जोड़ने के लिए एक महत्वपूर्ण पुल का काम करेगा।

’बिम्सटेक’ की बैठक में महत्वपूर्ण भाषण देते हुए भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि इस क्षेत्र के लोगों को आगे बढ़ने के लिए अब स्वर्णिम अवसर है और इसके कारण इस क्षेत्र के लोग आपस में मिलकर आर्थिक, सामाजिक और यातायात की समस्याओं का समाधान कर सकते हैं और आपस में मिलकर पूरे क्षेत्र का विकास कर सकते हैं।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि जब से वे भारत के प्रधानमंत्री बने हैं, उनका यह प्रयास रहा है कि पूरब के देशों के साथ मजबूत संबंध बनाए जाएं। यहां यह याद रखने वाली बात है कि भारत के पूर्व प्रधानमंत्री नरसिंहराव ने ‘लुक इस्ट पॉलिसी’ बनाई थी। नरेन्द्र मोदी ने एक कदम आगे चलकर ‘एक्ट इस्ट पॉलिसी’ बनाई।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि इस क्षेत्र का कोई भी देश ऐसा नहीं है जिसने आतंकवाद का दंश नहीं भुगता है। इसलिए यह आवश्यक है कि बंगाल की खाड़ी के आसपास के देशों के लोग एक होकर अपनी समस्याओं का समाधान करें। सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए नेपाल के प्रधानमंत्री के पी शर्मा ओली ने कहा कि वे पूरी तरह भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विचारों से सहमत हैं और यह प्रयास किया जाना चाहिए कि इस क्षेत्र के लोग मिलकर अपनी समस्याओं का समाधान करें।

उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र के लोग सभ्यता, इतिहास, भाषा, खानपान और संस्कृति से आपस में जुड़े हुए हैं। इसलिए यह आवश्यक है कि ये सभी देश आपस में मिलकर चलें। नेपाल के प्रधानमंत्री ने कहा कि यह नहीं सोचना चाहिए कि यह संस्था ‘सार्क’ का दूसरा विकल्प है। बल्कि ‘बिम्सटेक’ और ‘सार्क’ एक दूसरे के पूरक हैं। ‘बिम्सटेक’ में अनेक ऐसे सदस्य हैं जो ‘सार्क’ के भी सदस्य हैं और ‘आसियान’ के भी सदस्य हैं। कहना नहीं होगा कि ‘बिम्सटेक’ के बनने से भारत का इस क्षेत्र में प्रभुत्व बहुत अधिक बढ़ जाएगा।

सबसे बड़ी बात तो यह है कि चीन जिस तरह इस क्षेत्र के देशों में अपनी घुसपैठ बढ़ा रहा था वह रूक जाएगा। चीन का खतरा इस क्षेत्र के सभी देशों को है। परन्तु वे खुलकर अपनी बात कह नहीं पा रहे थे। अब जब भारत ने इस दिशा में पहल की है तो इसमें कोई संदेह नहीं कि ‘बिम्सटेक’ इस क्षेत्र के लोगों का एक मजबूत संगठन होगा और हर दृष्टिकोण से यह ‘मील का पत्थर’ साबित होगा।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ठीक कहा है कि अब आपस का संपर्क बढ़ाने का बडा मौका आया है। व्यापारिक, आर्थिक, यातायात, डिलीटल और जनता से जनता का संपर्क अब बहुत अधिक बढ़ेगा। और  सही अर्थ में ‘एक्ट इस्ट’ की नीतियां कामयाब होंगी। इस बैठक के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना से दोनों देशों की विभिन्न समस्याओं पर विस्तार से विचार किया। उन्होंने नेपाल की राष्ट्रपति से भी मुलाकात की और उन्हें भरोसा दिलाया कि भारत हर हालत में नेपाल के सुख दुख में साथ खड़ा रहेगा।

काठमांडु में इस बैठक के दौरान भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने एक विशालकाय धर्मशाला का उद्घाटन किया जो भारत की ओर से बनाई गई  है और जहां आकर लोग पशुपतिनाथ के दर्शन कर सकेंगे। उन्होंने कहा कि भगवान शंकर ने उन्हें प्रेरणा दी और वे गुजरात से बाबा विश्वनाथ के दरबार में आए और फिर भगवान शंकर ने उन्हें पशुपतिनाथ के दर्शन करने के लिए नेपाल भेजा। वे नेपाल की जनता के प्रेम से अभिभूत हैं। जनकपुरी और अवधपुरी के बीच तो अब बस सेवाएं भी चल रही हैं और इसलिए इस बात की अब पूरी संभावनाएं हैं कि दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक संबंध मजबूत होंगे।

कुल मिलाकर भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ‘बिम्सटेक’ को मजबूत करने की जो पहल की है वह हर दृष्टिकोण से प्रशंसनीय है। इससे पाकिस्तान को भी तमाचा लगेगा और वह यह सोचने के लिए मजबूर हो जाएगा कि उसकी आतंकी हरकतों की निन्दा इस क्षेत्र के सारे देशों में हो रही है। नरेन्द्र मोदी की पहल का स्वागत किया जाना चाहिए और यह उम्मीद की जानी चाहिए  कि ‘बिम्सटेक’ आने वाले वर्षों में एशियाई देशों में महत्वपूर्ण स्थान बना लेगा।
-गौरीशंकर राजहंस
 

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