पदकों के लिए दशकों का इंतजार क्यों? - Dainik Navajyoti
Dainik Navajyoti Logo
Saturday 17th of November 2018
Home   >  Opinion   >   News
ओपिनियन

पदकों के लिए दशकों का इंतजार क्यों?

Wednesday, September 12, 2018 08:55 AM

इंडोनेशिया में आयोजित हुए 18वें एशियाई खेलों में भारत ने शानदार प्रदर्शन कर 67 साल के एशियाई खेलों के इतिहास में पहली बार विभिन्न स्पर्धाओं में 15 स्वर्ण, 24 रजत और 30 कांस्य पदक सहित कुल 69 पदक हासिल कर ऐसी स्वर्णिम सफलता हासिल की। 2010 में भारत ने 14 स्वर्ण, 17 रजत और 34 कांस्य सहित कुल 65 पदक हासिल किए थे। 1951 के बाद भारत का एशियाई खेलों में इस बार सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन रहा, जब उसने स्वर्ण पदकों के मामले में 67 साल पुराने रिकॉर्ड की बराबरी की। एशियाई खेलों में भारत ने सबसे बेहतरीन प्रदर्शन 1951 में किया था, जब 15 स्वर्ण, 16 रजत और 20 कांस्य पदक जीतकर 51 पदकों के साथ इस स्पर्धा में दूसरे स्थान पर रहा था

जबकि 1982 में भी अच्छा प्रदर्शन करते हुए 13 स्वर्ण, 19 रजत और 25 कांस्य पदकों के साथ 57 पदक जीतकर पांचवें स्थान पर रहा था लेकिन 2014 में केवल 11 स्वर्ण, 9 रजत और 37 कांस्य सहित कुल 57 पदक हासिल हुए थे।। अभी तक हुए 18 एशियाई खेलों में भारत ने कुल 685 पदक जीते हैं, जिनमें 154 स्वर्ण, 202 रजत और 329 कांस्य पदक शामिल हैं।
हालांकि 67 साल के इतिहास में 15 स्वर्ण सहित कुल 69 पदक जीतकर भारत ने एशियाई खेलों में अपना रिकॉर्ड बेहतर अवश्य किया और कई स्पर्धाओं में खिलाड़ियों ने उम्मीद से भी अच्छा प्रदर्शन किया किन्तु पदक तालिका पर नजर डालें तो स्थिति इतनी शानदार भी नहीं है कि हम इसी के जश्न में डूबकर जमीनी हकीकत को ही भूल जाएं।

यह अच्छी बात रही कि जहां कुछ साल पहले तक भारत के बारे में यही मान्यता थी कि हमारे खिलाड़ी क्रिकेट के अलावा बाकी अधिकांश खेलों में सिर्फ  अपनी उपस्थिति दर्ज कराने जाते हैं और एथलेटिक्स में तो हमारे खिलाड़ी कुछ कर ही नहीं सकते लेकिन इस बार कई खेलों में अद्भुत प्रदर्शन करते हुए हमारे खिलाड़ियों ने कई एथलेटिक्स खेलों में भी सफलता के झंडे गाड़े किन्तु अगर सभी खेलों में भारतीय खिलाड़ी उम्मीद के अनुरूप खेलते तो स्थिति और भी बेहतर हो सकती थी।

देश की कुल आबादी के हिसाब से देखा जाए तो हमारा प्रदर्शन ओलम्पिक, एशियाड और राष्टÑमंडल खेलों में बहुत छोटे देशों के बराबर ही रहता है, इसलिए एशियाई खेलों में भी भारत की स्थिति सम्मानजनक नहीं, सिर्फ  संतोषजनक ही कही जा सकती। भारत पदक तालिका में 8वें स्थान पर रहा, जहां चीन, जापान, दक्षिण कोरिया, इंडोनेशिया, उज्बेकिस्तान, ईरान तथा चाइनीज ताइपे स्वर्ण पदक के मामले में भारत से काफी आगे रहे। चीन को 132 स्वर्ण, 92 रजत और 65 कांस्य, जापान को 75 स्वर्ण, 56 रजत और 74 कांस्य, दक्षिण कोरिया 49 स्वर्ण, 58 रजत और 70 कांस्य, इंडोनेशिया 31 स्वर्ण, 24 रजत और 43 कांस्य, उज्बेकिस्तान 21 स्वर्ण, 24 रजत और 25 कांस्य, ईरान 20 स्वर्ण, 20 रजत और 22 कांस्य, चाइनीज ताइपे को 17 स्वर्ण, 19 रजत और 31 कांस्य पदक हासिल हुए।

भारत के लिए यह जश्न की बात अवश्य है कि इस बार के एशियाई खेलों में उसने कई स्पर्धाओं में पदक जीतकर नए कीर्तिमान स्थापित किए। 16 वर्षीय सौरभ चौधरी ने 10 मीटर एयर पिस्टल में सबसे कम उम्र में स्वर्ण पदक और 15 वर्षीय विहान ने सबसे कम उम्र में पुरूषों की डबल ट्रैप स्पर्धा में रजत पदक जीतकर इतिहास कायम कर दिया। इसी प्रकार प्रणब बर्धन 60 वर्ष की आयु में ब्रिज में भारत को 15वां स्वर्ण पदक दिलाकर सबसे उम्रदराज खिलाड़ी बन गए। 20 वर्षीय नीरज चोपड़ा पुरूषों की भालाफैंक स्पर्धा में 88.06 मीटर दूरी तय कर एशियाई खेलों में भारत के लिए स्वर्ण पदक जीतने वाले पहले भारतीय बने। इसी प्रकार रेसलर विनेश फौगाट महिलाओं की 50 किग्रा वर्ग की फ्रीस्टाइल कुश्ती में स्वर्ण पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला पहलवान बनीं।

25 मीटर पिस्टल इवेंट में स्वर्ण जीतकर राही सर्नोबत एशियाई खेलों के इतिहास में निशानेबाजी में व्यक्तिगत स्वर्ण पदक जीतने वाली पहली भारत महिला शूटर बन गई। दांत दर्द के बावजूद स्वप्ना बर्मन हेप्टाथलॉन में स्वर्ण जीतने वाली पहली भारतीय बन गई। 1986 का उड़नपरी पीटी उषा का रिकॉर्ड तोड़ते हुए दुती चंद रजत जीतने में सफल हुई जबकि 36 साल बाद हीमा दास और अनस भी भारत के लिए 400 मीटर दौड़ में रजत पदक जीतने में सफल हुए। घुड़सवारी में भी भारत को 36 साल बाद फवाद मिर्जा ने रजत पदक दिलाया। टेबल टेनिस में भारत को एशियाई खेलों में पहली बार कोई पदक मिला। पुरूषों की टीम स्पर्धा तथा मिक्स्ड डबल्स स्पर्धा में एक-एक कांस्य पदक हासिल हुआ।

कबड्डी में महिला और पुरूष दोनों ही वर्गों में निराशा हाथ लगी क्योंकि इन दोनों टीमों को स्वर्ण की प्रबल दावेदार माना जा रहा था, वहीं इन्हें इस बार रजत और कांस्य पदक से ही संतोष करना पड़ा। इसी प्रकार रियो ओलंपिक तथा विश्व चौंपियनशिप की रजत पदक विजेता पीवी सिंधू को बैडमिंटन में एशियाई खेलों में रजत पदक से ही संतोष करना पड़ा लेकिन इसके साथ ही वह एशियाई खेलों में बैडमिंटन में रजत हासिल करने वाली पहली महिला खिलाड़ी बन गई जबकि साइना नेहवाल को कांस्य पदक हासिल हुआ। सेपक टेकरा नामक खेल एशियाई खेलों में 1990 में पहली बार शामिल किया गया था, इसमें भारत पहली बार कोई पदक जीतने में सफल हुआ।

पुरूषों की टीम को इस स्पर्धा में कांस्य पदक हासिल हुआ। कुश्ती, बॉक्सिंग, हॉकी तथा कबड्डी में हमारा प्रदर्शन संतोषजनक नहीं रहा। अंतर्राष्ट्रीय स्पर्धाओं में खिलाड़ियों द्वारा पदक जीतने पर विभिन्न सरकारों द्वारा उन पर धन वर्षा कर दी जाती है लेकिन अगर इस धन वर्षा के बजाय खेल संघों में व्याप्त राजनीति से निजात पाने और खेलों की दशा और दिशा सुधारने के लिए पर्याप्त निवेश की ओर पर्याप्त ध्यान दिया जाए तो ज्यादा बेहतर होगा।

चीन, जापान, दक्षिण कोरिया, इंडोनेशिया, उज्बेकिस्तान और ईरान जैसे देशों से सीख लेकर देश में खेलों का स्तर सुधारने के लिए जो भी उपाय जरूरी हों, किए जाने चाहिए। हमें इस बात से सीख लेनी होगी कि दूसरे देश हमसे ही कबड्डी सरीखे कुछ खेलों के दांव-पेंच सीखकर हमें ही हराने में कैसे सफल हो रहे हैं और इसी के अनुरूप हमें आगे के लिए अपनी तैयारियां करनी चाहिए। देश के खेल नीति नियंताओं को इस बात को लेकर गंभीर मंथन करना चाहिए कि सवा अरब आबादी वाले देश में न तो प्रतिभाओं की कोई कमी है और न ही जज्बे कीए फिर भी हमें अधिकांश खेलों में पदकों के लिए दो-तीन दशकों का लंबा इंतजार क्यों करना पड़ता है?

हालांकि यह अच्छी बात है कि तमाम अभावों से जूझते हुए अनेक बाधाएं पार कर कुछ खिलाड़ी अपनी प्रतिभा का कमाल दिखाते रहे हैं लेकिन कटु सत्य यही है कि देश में प्रतिभाओं की खोज और उनके प्रशिक्षण के लिए जमीनी स्तर पर ठोस प्रयास नहीं किए जाते अन्यथा बार.बार ऐसे उदाहरण सामने आते रहे हैं।     
-योगेश कुमार गोयल




 

Other Latest News of Opinion -

समलैंगिकता: अब अपराध नहीं बल्कि मानवाधिकार

सुप्रीम कोर्ट ने दो वयस्कों के बीच आपसी सहमति से समलैंगिक संबंध को अपराध की श्रेणी से बाहर कर दिया है। चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने सहमति

14 Sep 08:40 AM

उत्सव और मातम से परे हिंदी का सच

हिंदी विश्व की सर्वाधिक बोली जाने वाले पहली, दूसरी, तीसरी भाषा है या जैसा भी उत्साही भक्तों को लिखने-बोलने के उस क्षण में उचित लगे।

14 Sep 08:35 AM

अपने-अपने दर्द और दरारें!

मंगल को भले ही बाजार और रुपया लुढ़के पड़े थे, लेकिन राजस्थान में सियासी-पारा पूरे उछाल पर था। बाकायदा बैठकों, गौरव और संकल्प यात्राओं के तामझाम के साथ।

13 Sep 10:55 AM

मोदी का अटल-अंबेडकर कार्ड

भाजपा ने अपनी चुनावी रणनीति बदली है, चुनावी रणनीति में ऐसे महापुरूष को केन्द्र में लाई है जो कुछ सालों तक भाजपा के विचार केन्द्र में थे ही नहीं।

13 Sep 08:30 AM

अनेकता में एकता की भाषा है हिन्दी

किसी भाषा का गौरव उसके सृजन, सामाजिक सरोकार और संस्कार-विचार से तय होता है लेकिन ‘मेरे भारत-महान्’ में पिछले 70 साल से ये एक बात भी तय नहीं हो पा रही है कि हिन्दी हमारी मातृभाषा है या सम्पर्क भाषा है या राष्ट्रभाषा है?

13 Sep 08:25 AM