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प्रधानमंत्री मोदी ने गलत क्या कहा

Monday, January 07, 2019 09:05 AM

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी

पिछले कई महीनों से विपक्ष के नेता प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर लगातार यह आरोप लगा रहे थे कि वे न तो प्रेस कांफ्रेंस करते हैं और न किसी पत्रकार को कोई इन्टरव्यू देते हैं। विपक्ष के नेताओं के इस आरोप को खारीज करते हुए प्रधानमंत्री ने गत 1 जनवरी को देश की एक प्रमुख न्यूज एजेंसी को एक विस्तृत साक्षात्कार दिया जिसे देश के अन्दर और देश के बाहर करोड़ों लोगों ने लाइव देखा। तब से आज तक इस साक्षात्कार की देश के कोने कोने में चर्चा हो रही है। एनडीए की सहयोगी पार्टियों ने भी कहना शुरू कर दिया था कि प्रधानमंत्री ने तो कई बार वायदा किया। परन्तु यह कभी नहीं बताया कि अयोध्या में राम मंदिर कब बनेगा। कुछ सहयोगी पार्टियों का यह मत था कि संसद में एक बिल पास करके या संसद सत्र के बाद कोई अध्यादेश लाकर प्रधानमंत्री देश को बता दें कि अयोध्या में राम मंदिर कब बनने जा रहा है।

परन्तु सारी अटकलों को खारिज करते हुए प्रधानमंत्री ने दो टूक कहा कि राम मंदिर पर फिलहाल कोई अध्यादेश नहीं लाया जा रहा है। संविधान के दायरे में ही रहकर राम मंदिर बनेगा और सुप्रीम कोर्ट में जो केश चल रहा है उसके बाद फैसला होगा। प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि सुप्रीम कोर्ट में यह मामला अपने अंतिम चरण में है और उन्हें उम्मीद है कि इस संदर्भ में फैसला जल्दी आ जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि यह दुर्भाग्य की बात है कि कांग्रेस के वकील सुप्रीम कोर्ट में बाधाएं उत्पन्न कर रहे हैं। इसके चलते राम मंदिर मसले की सुनवाई की गति धीमी हो गई है। उन्होंने कांग्रेस पार्टी से अपील की कि वे अपने वकीलों को केस में अड़ंगा लगाने से बाज आने के लिए कहे। सही अर्थ में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का राम मंदिर के बारे में दो टूक कहना अत्यन्त ही सराहनीय है।

सर्जिकल स्ट्राइक को लेकर भी विपक्ष के नेताओं ने बहुत हंगामा किया है। विपक्ष के नेताओं ने कहा कि एनडीए सर्जिकल स्ट्राइक का राजनीतिकरण कर रहा है। प्रधानमंत्री ने कहा कि उन्होंने या उनकी पार्टी ने कभी सर्जिकल स्ट्राइक का राजनीतिकरण नहीं किया। सर्जिकल स्ट्राइक के बारे में सेना के वरिष्ठ अफसरों ने जनता को जानकारी दी था।
प्रधानमंत्री ने कहा कि सर्जिकल स्ट्राइक में हमने बहुत बड़ा जोखिम लिया था। जिन जवानों को हमने सीमा पार भेजा था उनके लौटने तक हमारी सांसे अटकी हुई थीं। उन्होंने कहा कि हमें बताया गया था कि सुबह होने के पहले जवान अपनी सीमा में लौट आएंगे। लेकिन जब तक सारे जवान सकुशल वापस नहीं लौटे लगातार हमारी चिन्ता बनी हुई थी। राहत तब हुई जब हमारा अंतिम जवान हमारी सीमा में सकुशल वापस आ गया।

प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि पाकिस्तान एक लड़ाई से सुधरने वाला नहीं है। पाकिस्तान को सबक सिखाने के लिए और भी कुछ कारगर तरीके अपनाए जाएंगे। परन्तु उन्होंने यह खुलासा नहीं किया कि वे तरीके क्या होंगे। कहने का अर्थ है कि मोदी सरकार पूरी तरह पाकिस्तान को सबक सिखाने के लिए तैयार है। महागठबंधन के बारे में उन्होंने कहा कि ये सभी घिसी-पिटी पार्टियां अपने को बचाने के लिए एक दूसरी पार्टियों की मदद कर रही हैं। उनका विरोध मोदी से है। विचारों में ये विरोधी दल शून्य हैं और अभी तक अपना नेता भी तय नहीं कर पाए हैं। उनका एक सूत्रीय कार्यक्रम है ‘मोदी हटाओ’।

परन्तु देश के करोड़ों लोग मोदी के काम से संतुष्ट हैं। इसलिए विरोधियों का विरोध केवल दिवास्पन ही बनकर रह जाएगा। हाल में उन राज्यों में एनडीए की हार हुई है तो उन्होंने कहा कि तेलंगाना और मिजोरम में भाजपा थी ही नहीं। उसी तरह मध्य प्रदेश और छतीसगढ़ में 15 सालों की सत्ता विरोधी (एंटी इंकम्बेंसी) लहर थी। इसलिए इस संदर्भ में हमारी हार को बढ़ा चढ़ाकर नहीं देखना चाहिए।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि यह ध्यान देने वाली बात है कि हाल में ही त्रिपुरा, हरियाणा, असम और जम्मू कश्मीर के निकाय चुनावों में भाजपा को भारी सफलता मिली है। असम और त्रिपुरा में तो गठबंधन को धूल चाटनी पड़ी। उन्होंने कहा कि विपक्षी नेता कहते हैं कि अगले चुनाव में भाजपा को बहुत कम सीटें मिलेंगी। जबकि यह बिल्कुल निराधार बातें हैं। 2014 के चुनाव से पहले भी समाचारपत्रों में ये नेता यही बयान देते थे कि भाजपा और उसके सहयोगी दलों को बहुतमत नहीं मिल पाएगा। परन्तु उनकी पार्टी ने पूर्ण बहुमत प्राप्त करके यह दिखा दिया कि उनकी सारी अटकलें बेमानी थी।  प्रधानमंत्री ने कहा कि रिजर्व बैंक के गवर्नर उर्जित पटेल ने स्वयं इस्तिफ दिया था, उन पर किसी प्रकार का दबाव नहीं था। अपने डेढ़ घंटे के इन्टरव्यू में उनकी सरकार द्वारा जनता के लिए की गई कल्याणकारी योजनाओं को गिनाया और यह उम्मीद जताई कि जनता उनकी इन योजनाओं से पूरी तरह संतुष्ट होगी।


अब आम चुनाव के लिए केवल चार महीने रह गए हैं और दोनों तरफ से आरोप प्रत्यारोप का दौर चलता रहेगा। निष्पक्ष रूप से देखने पर यह विचार आता है कि कठिन परिस्थितियों में भी नरेन्द्र मोदी के कार्य निश्चित रूप से सराहनीय रहे। अब सारे देश की जनता सांसे रोककर अगले चुनाव का इन्तजार करेगी।

- गौरीशंकर राजहंस
 

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