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ओपिनियन

राज काज में क्या है खास

Monday, January 07, 2019 09:10 AM

इंतजार बुध का
हाथ वाले भाई लोगों को बुध का बेसब्री से इंतजार है। हो भी क्यों ना, उस दिन पिंकसिटी में गणेशजी का नाम लेकर उनके राजकुमार धरती पुत्रों का आभार प्रकट जो करेंगे। आभार देना भी लाजमी है, चूंकि राजस्थान, मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में राज बदलने में किसानों ने जो आहूति दी, उसकी सपने में भी उम्मीद नहीं थी। इंदिरा गांधी भवन में बने पीसीसी के ठिकाने पर चर्चा है कि नौ तारीख को नवें चौघड़िया में उनके वेटिंग पीएम दिल्ली दरबार पर कर्ज माफी के दबाव के लिए अपनी बात नेहरूजी, शास्त्रीजी और इंदिराजी के जमाने में कृषि क्षेत्र में किए कामों से करेंगे या फिर अपने ही वक्त का जिक्र करेंगे।

किसके आदमी
सूबे के चुनावों में टिकट बँटवारे को लेकर अपनी छिछालेदर कराने वाली भगवा पार्टी में एक बार फिर चर्चा जोरों पर है। दिल्ली दरबार के लिए चुनावी जंग अभी पांच महीने बाकी है, पर सरदार पटेल मार्ग स्थित बंगला नंबर 51 में बने भगवा वालों के ठिकाने पर कुछ लोग अंगुलियों पर आंकड़े गिनाने में व्यस्त हो रहे हैं। चर्चा है कि लोकसभा की कुल 25 सीटों में तीन पर ओमजी, दो पर चन्द्रशेखरजी और बीस पर मैडम के आदमी चुनाव समर में उतरेंगे। सूबे के चुनावों में भी हिस्सेदारी का अनुपात लगभग यह ही था।

मजबूरी का नाम
इन दिनों राज में सीएमओ के बड़े साहब के तेवरों के सामने अच्छे-अच्छे धुरंधर अफसर बगले झांकते हैं। कुछ दिनों पहले कुर्सी संभालते ही साहब ने संकेत दे दिए थे कि अब उलटा-सीधा नहीं चलेगा और राज के हिसाब से काज होगा। अब जोधपुर से ताल्लुकात रखने वाले साहब को कौन समझाए कि काज तो हमेशा ही राज के हिसाब से हुए हैं। पानी वाले महकमे में बजट से ज्यादा जारी स्वीकृतियों के मामले में साहब के गर्म तेवरों को यह कह कर ठण्डा किया गया कि जो मजबूरी आपकी है, वो ही पहले वालों की थी। इसीलिए तो मजबूरी की तुलना महात्मा गांधी से की जाती है।

तार वीणा का
कहावत है कि वीणा के तार को इतना मत खींचो कि वह टूट जाए और इतना ढीला भी मत छोड़ो कि वह बजे ही नहीं। दौसा वाले मीनेश वंशज डॉक्टर को यह कहावत देर से समझ में आई। सूबे की सबसे बड़ी पंचायत में अपनी अर्द्धांगिनी को जगह नहीं दिला पाने के साथ ही उनके तेवर भी बदल गए। राज का काज करने वालों में चर्चा है कि अगर लोकसभा चुनावों में अपने हिसाब से चार प्रत्याशियों को लड़ाने की जिद से मीणा रूपी वीणा के तार के टूटने की नौबत आई, तो किरोड़ीजी हाथ खींचने में न तो आगा सोचेंगे और न ही पीछा। उनको समझ में आ गई कि तार टूट गया तो चारों सीटों के लिए मिलने वाला मौका भी हाथ से निकल जाएगा।

असर धमकी का
असर तो असर ही होता है, यह कब किस पर दिख जाए, कहना मुश्किल है। कइयों की तो रातों की नींद और दिन का चैन तक गायब हो जाता है। अब देखो ना हाथ वाली पार्टी के सीधे-सादे जोधपुर वाले जादूगर की धमकी का असर साफ नजर आने लगा है। उनके तीखे तेवरों से कानाफूसी करने वाले कई चमचों के पसीने छूट रहे हैं, चूंकि उनको घर भेजने की तैयारी जो कर ली गई है। चमचों को समझ में भी आ गया कि 135 साल से उतार-चढ़ाव झेल रही पार्टी में धमकियों का असर नहीं होता। तीस साल पहले गुलाबीनगरी में श्रीरामजी हश्र सबके सामने है।
 

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