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आन गांव के सिद्ध!

Thursday, October 11, 2018 09:35 AM

मंत्रणा के मंच पर बैठी बत्तीसियां आज राहुल गांधी के इस बयान को दाद दे रही थीं कि कांग्रेस इस बार अपना कोई पैराशूटी प्रत्याशी चुनावी मैदान में नहीं उतारेगी। इसकी कुछ लोग तारीफ कर रहे थे, तो कुछ को यह बात रास नहीं आई। एक बत्तीसी का तर्क था कि कितने ही तर्क-वितर्क कर लो, पार्टियां ऐनवक्त पर जिताऊ प्रत्याशियों की आड़ लेकर, पैराशूटी धनबलियों और बाहुबलियों को मैदान में उतार ही देती हैं।

भले ही स्थानीय प्रत्याशी कितने ही रोळै मचाएं या माथाफोड़ी करते फिरें। हामी भरती दूसरी बोली-देखो भाई आप तो जानते ही हो कि अपने यहां एक कहावत बड़ी प्रसिद्ध है-‘घर का जोगी जोगणा, आन गांव का सिद्ध’। कहने की बात अलग होती है, करने की बात अलग। भले ही गांव भर में अपने ढोल बजाते फिरो। अब आप ही देखो न, दो दिन पहले ही अपने पंचायतीराज और ग्रामीण मंत्री राजेंद्रसिंह राठौड़ साहब सचिन पायलट साहब को लेकर बोले थे कि वे तो खुद पैराशूटी प्रत्याशी हैं।

तर्क भी दिया। पूछ लो वे राजस्थान के किस गांव में पैदा हुए, कहां के रहने वाले हैं? राहुल की सभा में उमड़ती भीड़ पर भी बोले-उससे ज्यादा भीड़ तो हमारी गौरव-यात्राओं के दौरान उमड़ी थी। इसके ठीक विपरीत कांग्रेसी नेता धौलपुर, भरतपुर और दौसा जिलों में हुई राहुल गांधी के रोड शो और जन सभाओं में उमड़ी भीड़ की तुलना जनसैलाब से कर रहे हैं। उमड़ी भीड़ देखकर दो महीने बाद अपनी सरकार आने का सपना देख रहे हैं।

राठौड़ साहब के पैराशूटी उम्मीदवारों के संदर्भ में उठाए गए सवाल पर ऐतराज जताती प्रदेश कांग्रेस उपाध्यक्ष अर्चना शर्मा ने जवाबी धावा बोला उनकी सीएम की जन्मस्थली कहां की है? लालकृष्ण आडवाणी कहां जन्मे थे? पायलट के पिता राजेश पायलट तो राजस्थान का कई बार संसद में प्रतिनिधित्व कर चुके थे। जवाब में एक भाजपाई बत्तीसी कुलबुलाई-किसी जमाने में तो राजेश पायलट भी तो कांग्रेस के पैराशूटी प्रत्याशी के रूप में ही भरतपुर से उतारे गए थे।

बाद में उन्हें दौसा के मैदान में उतारा गया था। सिर्फ  एक नेता ही नहीं, कांग्रेस ने तो कई धुरंधर पैराशूटी उम्मीदवार बूटासिंह, बलराम जाखड़, टोंक से क्रिकेट खिलाड़ी अजहरूद्दीन को राजस्थान लाकर चुनाव लड़वाया था। नाथद्वारा वाले सीपी जोशी को पहले भीलवाड़ा और फिर जयपुर ग्रामीण संसदीय क्षेत्र से मैदान में उतारा था। बेचारे, टिकट की उम्मीद और कोशिशों में जुटे स्थानीय नेता पार्टी की खातिर भरी जवानी पार कर हांफते बुढ़ापे में आ पहुंचे।

रहा सवाल मैडम वसुंधरा राजे का, तो उनका ससुराल धौलपुर तो राजस्थान में ही है ना। बहू का जन्म भले ही कहीं का हो, घर तो ससुराल वाला ही कहलाएगा ना। तभी कांग्रेसी खेमे के समर्थन में उतरी एक बत्तीसी ने धावा बोला-भाजपाई कौन से दूध के धुले हैं, वे भी तो चुनावी दंगल में कई पैराशूटी उम्मीदवारों को उतारते आए हैं। जनता पार्टी के जमाने में सीकर से चौधरी देवीलाल, अजय सिंह चौटाला, 2004 के चुनावों में बीकानेर से अभिनेता धर्मेंद्र।

जालौर से बंगारू लक्ष्मण, सुशीला लक्ष्मण, टोंक से सुखबीर जौनपुरिया, चित्तौड़ से जसवंत सिंह, मौजूदा उच्च शिक्षा मंत्री किरण माहेश्वरी को अजमेर से पैराशूटी उम्मीदवार के रूप में संसद का चुनाव लड़वाया था। विधानसभा चुनावों में भी भैरोंसिंह शेखावत, विधानसभा अध्यक्ष कैलाश मेघवाल, मौजूदा मंत्री श्रीचंद कृपलानी, किरण माहेश्वरी, गृह मंत्री गुलाबचंद कटारिया, कृषि मंत्री प्रभुलाल सैनी आदि कई ऐसे धुरंधर नेता हैं जो पैराशूटी उम्मीदवार कहो या आन गांव के सिद्ध के रूप में चुनाव जीते भी और हारे भी।    
 

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