हाड़ौती रा भर्तृहरि - Dainik Navajyoti
Dainik Navajyoti Logo
Sunday 17th of February 2019
Home   >  Opinion   >   News
ओपिनियन

हाड़ौती रा भर्तृहरि

Monday, February 11, 2019 12:55 PM

राज्य-मंत्रणा

आज राज्य-मंत्रणा के मंच पर ‘भतृहरि’ विराजमान थे। ये  भर्तृहरि, ना तो उज्जैन वाले राजा थे और ना ही अलवर जिले के वैरागी भर्तृहरि-धाम वाले। ये थे-हाड़ौती वाले। बारां जिले के अटरू क्षेत्र के सकतपुर गांव वाले पंडित लोक नारायण शर्मा। कवि तो वे भी रहे, ये भी रहे। वे संस्कृत के थे, ये राजस्थानी(हाड़ौती) के हैं। उन्होंने संस्कृत में भतृहरि श्रृंगार शतकम्, नीति शतकम् और वैराग्य शतकम् लिखा।

इन्होंने उनके संस्कृत में लिखे ग्रंथों को राजस्थानी भाषा में अनुवाद किया। अनुवाद इतनी सरल, सहज हाड़ौती बोली में किया कि आमजन में ये आज ‘ हाड़ौती रा भर्तृहरि’ के नाम से जाने जाते हैं। वैराग्य शतकम् का अनुवाद करते-करते तो ये सात साल तक खुद वैरागी हो गए। बाकायदा एक टांग पर खड़े होकर हठयोग किया सो अलग। सुबह मंगलाचरण के बाद अनुवाद करते।

श्रृंगार शतकम् का अनुवाद करते समय श्रृंगार रस में भी डूबे। इन दोनों अवस्थाओं में इनकी ऐसी हालत देखकर पत्नी ने यहां तक कह दिया कि ये तो पगला गए। भतृहरि के साहित्य के अनुवाद करने की ओर कैसे बढ़े, इसका राज भी बताया-‘एक रोज अखबार की रद्दी खरीदने वाला मेरे घर आया। पास की दुकान पर वह चाय पीने बैठा था। मैंने उसकी रद्दी में कुछ पुरानी पुस्तकें देखीं। मैं उत्सुकता से उसे देखने लगा।

उस रद्दी में मुझे भर्तृहरि बाबा की पुरानी फटी जाले लगी किताबें मिलीं। मैंने रद्दीवाले से कहा यह मुझे दे दो। वह चौंका, कुछ देर सोचकर बोला-ले, लो, बिना दाम दिए। मैंने कहा कि भाई मैं तो बिना दाम दिए नहीं लूंगा। थकहार कर मैंने चवन्नी में सौदा किया और उसके संगी-साथियों की चाय के दाम भरे’। खैर, शर्माजी को जन्म से ही संघर्ष की कई सौगातें झेलनी पड़ी।

तीन-चार महीने के हुए ही थे कि बघेरा इन्हें मुंह में दबाकर जंगल में ले भागा। बाद में बकरी चराने वालों ने जैसे-तैसे उससे छुड़ाकर घर पहुंचा दिया। पढ़ने लगे तो एक बार नदी में बह गए। पानी में बह रहे एक ठूंठ को पकड़ा। जान तो बच गई, लेकिन रात भर लहरों ने सांसों को उपर-नीचे करने में कोई कोरकसर नहीं छोड़ी, खैर जिंदा घर लौट आए। स्कूल में पढ़ने गए तो हाड़ौती के प्रसिद्ध जनकवि रघुराज सिंह हाड़ा जैसे गुरू मिले। उनसे प्रेरित होकर कविताएं लिखने लगे। कुछ बड़े हुए तो किसी बात को लेकर एक बार पिताजी के कोप का सामना करना पड़ा।

सो, पास के हनुमानजी के मंदिर में जाकर अपना जीवन यापन करना पड़ा। संस्कृत में उपाध्याय यानी हायर सेकंडरी करके भी इन्हें पोस्टमैन की नौकरी करनी पड़ी। बाद में जब महकमे के किसी बड़े अफसर ने इनकी मार्कशीट देखी तो प्रमोशन कर इन्हें विभाग में पर्यवेक्षक पद पर नियुक्त किया। खैर, यह तो रहा इनका जीवन संघर्ष, आज इनके जीवन के पूरे तिहत्तर साल होने जा रहे हैं। अनुवाद के अलावा इन्होंने कविता संग्रह-‘अब तो पीऊं उजालो’, उपन्यास-‘राज करे छे सोभाग’ की रचना भी की। पचास-साठ नाटकों में अभिनय भी किया। बताते हैं-नाटकों में संवाद बोलने से इनको भाषा का ज्ञान हुआ। शिक्षकों ने इन्हें व्याकरण का ज्ञान कराया।

कविता के भाव उपजने के पीछे का राज बताया-‘नहरयां की गार गोदबो एकला हाथां एक टेम को रुखो-सूखों जीमण कर उबाणा पांव कठण मजूरी। ऊं की टूटी-फूटी आमदणी सूं ही हरदा में पढ़ाई की अमरजोत जळाबो ही बणग्यो छो म्हारी प्रेरणा को स्रोत। संघर्ष करतों जमाना का धक्का खातां बण बैठ्यो संवेदना को ऊं बीज, ज्यें घणा मानीता गुरुदेव रघुराज सिंह हाड़ा का गीतां सूं अर मानीता मदन लाल पवार की कवितावां सूं सींख्यों। दाणों अब अंकुरबा लाग ऊबो होबो सीख्यो छै’।
- महेश चंद शर्मा

Other Latest News of Opinion -

बढ़ रही है हिन्दी की वैश्विक मान्यता

भारत की मूल भाषा हिन्दी का भले ही देश के सभी राज्यों में समान सम्मान नहीं मिल रहा हो, लेकिन हिन्दी भाषा पहले से भी और वर्तमान में भी वैश्विक सम्मान

15 Feb 10:10 AM

युवा बेरोजगार हैं, किसान कर्जदार हैं

राजस्थान में पिछले 13 साल से गुर्जर आरक्षण चल रहा है, तो देश के विभिन्न राज्यों से जानकारी मिल रही है कि लाखों नौकरियां पड़ी हैं लेकिन कोई भर्ती नहीं की जा रही है।

14 Feb 09:05 AM

ममता ने गलत परिपाटी के बीज बो दिए

पश्चिम बंगाल के चर्चित सारदा चिट फंड घोटाले की जांच को लेकर दो दिन चली सियासी खींचतान पर सर्वोच्च न्यायालय ने जो व्यवस्था दी उसे दोनों पक्ष अपनी-अपनी नैतिक विजय मानकर फूले नहीं समा रहे हैं।

13 Feb 09:45 AM

धोखे की ढूंढ

राजस्थान विधानसभा में सोमवार को ‘धोखे’ की जमकर ढूंढ मची। ढूंढ दौरान मची नारेबाजी, हंगामों में सदन की कार्यवाही दो बार स्थगित करनी पड़ी।

12 Feb 11:20 AM

बिजली कंपनियों के खस्ता हाल क्यों?

कोयले से बिजली बनाने वाली थर्मल पावर कम्पनियां परेशानी में हैं। बीते समय में केंद्र सरकार ने कैबिनेट सचिव की अध्यक्षता में इनकी समस्याओं

12 Feb 09:35 AM