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हौसलों की बुलंदी!

Saturday, January 05, 2019 09:20 AM

राजस्थान विधानसभा के अध्यक्ष कैलाश मेघवाल (फाइल फोटो)

राज्य-मंत्रणा के मंच पर आज ‘हौसलों’ को लेकर चर्चा चल रही थी। आप तो जानते ही हैं कि इनके बूते असंभव कार्य को अंजाम दे, दुनिया को अचंभित किया जा सकता है। इसमें ना उम्र बाधा बनती है और ना कोई शारीरिक व्याधि। आप खुद मेघवाल साहब के इरादे सुनकर दंग रह जाएंगे। चौदहवीं राजस्थान विधानसभा के अध्यक्ष कैलाश मेघवाल। आज राजनीति के गलियारे में मिल गए। दुआ-सलाम के बाद बोले-मैं पिचासी साल का हो गया हूं, लेकिन मुझ पर उम्र भारी नहीं है। यदि पार्टी चाहेगी, तो मैं नब्बे साल का होने के बावजूद अगला चुनाव लड़ने की हिम्मत रखता हूं।

मेघवाल ने हाल ही संपन्न हुए विधानसभा चुनाव में शाहपुरा (भीलवाड़ा) सीट पर चुनाव लड़कर प्रदेश में सर्वाधिक चौहत्तर हजार से अधिक मतों से विजयश्री हासिल कर रिकॉर्ड बनाया। इनके सामने मैदान में उतरे कांग्रेस सहित सभी दस प्रत्याशियों की जमानत जब्त हो गई। नए विधानसभा अध्यक्ष के नियुक्त होने तक, वे अभी तक अपने दायित्व का निर्वहन कर रहे हैं। भले ही उन पर आरोप-प्रत्यारोपों की बौछारें हो रही हों।

फिर चाहे विधानसभा के पिचहत्तर कर्मचारियों की पदोन्नति के आदेश निकालने का मामला हो या फिर पिचहत्तर नव-निर्वाचित विधायकों को आवास आवंटित करने का मामला। आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहते हैं कि जब तक नया विधानसभा अध्यक्ष चुन नहीं लिया जाता, तब तक मुझे दायित्वों के निर्वहन के लिए ना राज्यपाल रोक सकते हैं और ना ही मुख्यमंत्री। अपने राजनीतिक जीवन में सिर्फ  इस एक मात्र दायित्व का ही निर्वहन नहीं किया, बल्कि विधायकी में वे अपनी छठवीं पारी खेल रहे हैं। तीन बार संसद में भी जा चुके हैं।

केंद्र और राज्य में सामाजिक अधिकारिता विभाग, प्रदेश में सहकारिता, खान, गृह, पंचायतराज, सिंचाई और आपदा प्रबंधन जैसे विभागों के मंत्री पद का दायित्व भी निर्वहन कर चुके हैं। बातचीत में इस बार विधानसभाई चुनावों के परिणामों पर बोले-इस बार जनता-जनार्दन ने अपना रुख साफ  नहीं किया। कारण कांग्रेस और भाजपा के बीच वोट प्रतिशत में मामूली सा अंतर रहा है। संभव है हमारी यानी भाजपा के कार्यकर्ताओं की ही कोई कमी रही होगी, जो हम सत्ता को कायम नहीं रख पाए। लेकिन लगे हाथ उन्होंने यह दावा भी किया कि लोकसभा चुनावों में हम प्रदेश की सभी पच्चीस सीटें जीतेंगे। कारण देश को आगे बढ़ाने के लिए नरेंद्र मोदी जैसे मजबूत चेहरे की जरूरत है।

उन्होंने विदेशों में भारत की प्रतिष्ठा को बढ़ाया है। भाजपा को सत्ता से दूर करने के लिए कांग्रेस सहित कई राजनीतिक दलों के महागठबंधन के पूछे गए सवाल पर मेघवाल बोले-यह गठबंधन तो ‘खिचड़ी’ है। गठबंधन की खिचड़ी तो देश को कमजोरी की ओर ही धकेलेगी। भले ही यह ऊपरी तौर पर मजबूती दिखा रहा हो, लेकिन भीतर से एक नहीं है। गठबंधन तो मजबूरी है, कारण भाजपा से कई क्षेत्रीय दलों के सामने अस्तित्व का संकट जो उठ खड़ा हुआ है। खैर, मेघवाल साहब के बुलंद हौसलों पर तो हम यह शेर नजर करते हैं


उसे गुमां है कि मेरी उड़ान कुछ कम है।
मुझे यकीं है कि ये आसमान कुछ कम है।
- महेश चन्द्र शर्मा

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