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कर्ज बनाम कर्जमाफी!

Monday, January 07, 2019 09:15 AM

राज्य मंत्रणा

आजकल देश भर में ‘कर्जमाफी’ की जोरदार चर्चा चल रही है। कर्ज माफी भी किसानों की। कोई कर्ज माफी की आड़ में वोट गिन रहा है तो कोई वोट-बैंक के खिसकने से खीज रहा है। कोई खजाना खाली होने की चिंता में दुबला होके, कोस रहा है। डिफाल्टरों की तो मौज हो गई, अब उन्हें कर्ज चुकाने की कोई चिंता नहीं रही। कर्ज चुकाने वाले पछता रहे हैं। खुद को लानत भी दे रहे हैं कि आखिर कर्ज चुकाने में इतनी जल्दी क्यों कर दी? नई सरकार आने तक का इंतजार तो कर लिया होता। खैर, अब पछताए होत क्या, जब चिड़िया चुग गई खेत। चार्वाक आज होते, तो नई सरकारों के इस फैसले का स्वागत करते। धन्यवाद देते कि इस युग में सरकारें, उनके फॉलोअर्स की कितनी शुभ चिंतक निकलीं।

अब आप देखो, कांग्रेस के अवामी सदर राहुल गांधी तो मोदी सरकार को कर्ज माफी के लिए बाध्य करने की ठाने बैठे हैं। इसके विपरीत मोदी साहब यह फरमा रहे हैं वे किसानों की कर्जमाफी की बजाय उन अधूरी सिंचाई योजनाओं को पूरा करने को प्राथमिकता देंगे। कांग्रेस के लिए किसान सिर्फ और सिर्फ वोट बैंक है, लेकिन हमारे लिए तो वह अन्नदाता है, कांग्रेस और भाजपा में यही बुनियादी फर्क है। हमारी सरकार ने देश की 99 लंबित सिंचाई परियोजनाओं पर काम शुरू किया है, जो 90 हजार करोड़ की है। मैं इन्हें पूरा करना चाहूंगा, बजाय इस बात के कि कर्ज माफ  किया जाए। कांग्रेस सरकारें यदि समय रहते किसान हित की परियोजनाओं को पूरा कर देती, तो आज उनको कर्ज माफ करने की जरूरत नहीं होती।

इधर, राजस्थान में तो कांग्रेस के अध्यक्ष राहुल गांधी की 9 तारीख को आयोजित होने वाली रैली को लेकर जबरदस्त तैयारियां चल रही हैं। कांग्रेसी भाइयों को बड़ी उम्मीद है कि वे इस धन्यवाद रैली में किसानों के हित में और भी कोई बड़ा ऐलान कर सकते हैं। चुनाव पूर्व राहुल गांधी ने ऐलान किया था कि कांग्रेस सत्ता में आई, तो किसानों के कर्जे दस दिन के भीतर माफ  कर दिए जाएंगे। वो बात अलग है कि कर्जमाफी के लिए इतनी बड़ी धनराशि की बंदोबस्तगी कहां से और कैसे की जाएगी? अर्थशास्त्री से लेकर प्रशासन तक दंग है, कांग्रेस सरकार के पास क्या कोई अल्लादीन का चिराग है। खैर, कर्जमाफी की बात छोड़कर हम कर्ज की बात करते हैं।

इस कर्ज का हवाला कोई ओर नहीं, बल्कि प्रदेश राज्य मंत्री अर्जुनसिंह बामणिया दे रहे हैं। मंत्री बनने के बाद पहली बार अपने क्षेत्र पहुंचे। छोटी सरवन में आयोजित सभा में जनता से बोले-आपका वोट मुझ पर कर्ज है, विकास करके इसे ब्याज समेत चुकाऊंगा। मैं पिछली सरकार की तरह भाषण देने वाला मंत्री नहीं बना हूं। मैं काम करने वाला मंत्री हूं। पिछली बार हमारी सरकार ने क्षेत्र में आरओ पानी की सौगात दी थी, लेकिन भाजपा सरकार पांच साल में भी उसे पूरा नहीं कर सकी। हम जल्द इस कार्य को पूर्ण कर, क्षेत्र की जनता को शुद्ध पानी देंगे। है ना कहीं कर्जमाफी की बात और कहीं कर्ज होने का अहसास। अपनी बात इस शेर के साथ खत्म करते हैं

अदा हुआ न कर्ज और वजूद खत्म हो गया।
मैं जिंदगी का देते देते सूद खत्म हो गया।
- महेश चन्द्र शर्मा

 

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