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सवालों पर हंगामे!

Friday, September 07, 2018 10:20 AM

कॉन्सेप्ट फोटो

चोदहवीं विधानसभा के अंतिम सत्र के दूसरे रोज विधानसभा में ‘सवाल’ गरमाए। सवालों के बारे में तो आप जानते ही हैं कि कुछ सवाल मजेदार होते हैं। कोई ट्रिकी होते हैं, तो कोई मजाकिया। कुछ दिमागी होते हैं, तो कुछ अजीब। कोई पहेली बुझे या फिर राजनीति से लबरेज। जहां तक राजनीति से जुडे सवालों का प्रश्न होता है, तो बवाल मचता ही है। गरमाया माहौल, फिर हंगामों में तब्दील हो जाता है। हंगामे के नतीजतन गुरुवार को प्रश्नकाल और शून्यकाल की कार्यवाही पूरी तरह ‘होम’ हो गई।

इस मचे हंगामे से आसन यानी विधानसभा अध्यक्ष कैलाश मेघवाल इतने नाराज हुए कि उन्हें सदन की कार्रवाई पहले प्रश्नकाल में पौन घंटे, फिर शून्यकाल में पौने दो घंटे के लिए स्थगित करनी पड़ी। आज सदन में सवालों के भूतों को जाग्रत करने में अहम भूमिका निभाई कांग्रेस सचेतक गोविंद डोटासरा ने। पहले प्रश्नकाल में स्थगित प्रश्नों का बखेड़ा खड़ा कर दिया। फिर शून्यकाल में गौरव-यात्रा से जुड़े सवाल को पकड़ लाए। दोनों सवालों पर बवंडर उठना स्वाभाविक था। आसन को गुस्सा क्यों आया! विधानसभा अध्यक्ष की नाराजगी स्वाभाविक थी।

अध्यक्ष का यह कहना भी दमदार था कि उनकी व्यवस्था पर इस प्रांगण में किसी तरह की कोई चर्चा नहीं हो सकती। डोटासरा उनकी दी गई व्यवस्था पर ही सवाल उठा रहे थे। बाहर गलियारे में यह सवाल उठाते भी सुने गए कि अध्यक्ष की व्यवस्था को चुनौती क्यों नहीं दी जा सकती ? इस सवाल पर तो आसन से विपक्ष के नेता रामेश्वरलाल डूडी ने भी तीखी जिरह की।

आपत्ति थी, तो चैंबर में आते!
आसन का कहना था कि अध्यक्ष की व्यवस्था पर सवाल उठाकर चुनौती नहीं दी जा सकती। हां, मैंने निर्णय लिया है, आपको आपत्ति है, तो मेरे चैंबर में आइए। मैं प्रश्नकाल चलाना चाहता हूं। मुझे अफसोस है कि विपक्ष के हुड़दंग की वजह से सदन की कार्रवाई पौन घंटे स्थगित करनी पड़ रही है।

नियम-प्रक्रिया की पुस्तिकाएं लहराईं!
 मचे हंगामे के दौरान संसदीय कार्यमंत्री राजेंद्र राठौड़, गृहमंत्री गुलाबचंद कटारिया, सरकारी मुख्य सचेतक कालूलाल गुर्जर और उपमुख्य सचेतक मदन राठौड़ प्रक्रिया तथा कार्य संचालन संबंधी नियमावली के पन्ने निकालकर विपक्ष के सदस्यों को दिखलाने लगे।

नियम तो यह हैं!
गलियारे में बहस तो इस मुद्दे पर भी चल रही थी कि भले ही माननीय सदस्य हजारों सवाल पूछें, लेकिन नियम और प्रक्रिया यह है कि पूछे गए सवालों की बाकायदा सदस्यों के बीच लॉटरी निकाली जाती है। नियम है कि बडेÞ सत्रों में तारांकित प्रश्नावली में अधिकतम चालीस, अतारांकित में साठ प्रश्न ही शामिल किए जा सकते हैं। छोटे सत्रों में इनकी संख्या क्रमश: अधिकतम दस और बीस प्रश्नों वाली सूची ही होती है।

गौरव-यात्रा!
गुरुवार को शून्यकाल में स्थगन प्रस्तावों के तहत आए कुल बत्तीस प्रश्नों की लॉटरी में से सदन में चर्चा के लिए चार प्रश्नों का चयन किया गया। इसमें पहला प्रश्न हनुमान बेनीवाल का था। बेनीवाल के बोलना शुरू करते ही डोटासरा के गौरव-यात्रा के खर्चे से जुड़े सवाल को सदन में उछाल दिया।

ऐसे बवंडर में जहां विपक्ष के करीब एक दर्जन सदस्यों ने भाग लिया, वेल में आकर नारेबाजी की, तो जवाब में देने सार्वजनिक निर्माण मंत्री यूनुस खान, संसदीय कार्य मंत्री राजेंद्र राठौड़, उच्च शिक्षा मंत्री किरण माहेश्वरी, सामाजिक अधिकारिता मंत्री अरुण चतुर्वेदी, पर्यटन राज्य मंत्री कृष्णेंद्र कौर मुख्य और उपमुख्य सचेतकों को उतरना पड़ा।

हंगामे में ही बेनीवाल सवाल पूछ रहे थे और जवाब भी दे रहे थे गृहमंत्री कटारियाजी। सदन में सवालों को लेकर उठे हंगामों पर गलियारे में एक बत्तीसी को यह शेर पढ़ते हुए सुना गया-जवाब आए न आए, सवाल उठा तो सही।फिर इस सवाल में पहलू, नए सवाल के रख।
 

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