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Thursday 17th of January 2019
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चीन के युद्धोन्माद पर संज्ञान जरूरी

Wednesday, January 09, 2019 09:30 AM

चीन का युद्धोन्माद यदा-कदा दुनिया के सामने आता ही रहता हैै, कभी अपनी अराजक सैन्य शक्ति के प्रदर्शन के तौर पर चीन दुनिया को डराता है तो कभी युद्ध की धमकी देकर दुनिया को भयभीत है। पड़ोसी देश जैसे वियतनाम, ताईवान, भूटान, भारत तो चीन की अराजक हिंसक सामरिक शक्ति के सामने डरे हुए रहते हैं, भयभीत रहते हैं और अपनी सीमाओं की सुरक्षा के लिए चिंतित भी रहते हैं। चीन कब पड़ोसी देशों की सीमाओं का अतिक्रमण कर कब्जा जमा बैठे और अपनी सेना की तैनाती कर दे, यह कहा नहीं जा सकता है। वैश्विक दुनिया में महाशक्तियों का भविष्य और हित एक-दूसरे के साथ मकडजाल की तरह गुथे होते हैं।

इसलिए महाशक्तियों की क्रिया-प्रतिक्रिया, महाशक्तियों की हिंसा-प्रतिहिंसा का प्रभाव भी वैश्विक होता है, वैसे देश और वैसी आबादी भी प्रभावित होती है जो महाशक्ति के केन्द्र में नहीं होते हैं और न ही किसी गुट विशेष के होते हैं। यही कारण है कि दुनिया युद्धोन्माद या फिर सभी प्रकार की हिंसा-प्रतिहिंसा से चिंतित होती है और ऐसी सोच-प्रक्रिया को दुनिया की शांति के लिए खतरा माना जाता है। पर यह भी सही है चीन, अमेरिका, रूस जैसी शक्तियां अपने हितों और स्वार्थों को लेकर युद्धोन्माद पर उतर आती हैं और निर्दोष आबादी को भी शिकार भी बना लेती हैं।

दुनिया के अंदर में ऐसे कई उदाहरण सामने है जब महाशक्तियां अपने स्वार्थ और वैश्विक दादागिरी सुनिश्चित करने के लिए युद्ध लड़ी हैं, कमजोर देशों को कुचली है, कमजोर देशों के आर्थिक-प्राकृतिक संसाधनों को हड़पने का कार्य की हैं। निश्चित तौर पर चीन एक महाशक्ति है, चीन के महाशक्ति के कई आयाम हैं। महाशक्ति सिर्फ आर्थिक तौर पर ही नहीं हैं,बल्कि सामरिक तौर पर भी चीन एक महाशक्ति है, उसकी सेना की विशालता और क्षमता भी विशेष है, उसकी कूटनीति भी दुनिया भर में मारक क्षमता रखती है। चीन की कूटनीति यह देखती नहीं कि उनके निशाने पर आने या फिर उनके खतरनाक कदमों से कोई महाशक्ति नाराज होता है या फिर खुश होता है, वह कूटनीतिक प्रतिक्रिया की भी परवाह नहीं करता है। इसलिए वह दुनिया की कई वैश्विक संस्थाओं के प्रमुखों को भी जेलों में डाल देता है।

कुछ दिन पूर्व ही इंटरपोल के एक प्रमुख के लापता होने की खबर दुनिया भर में फैली हुई थी, उस लापता इंटरपोल के प्रमुख की कोई खबर नहीं मिल रही थी। बाद में पता चला कि इंटरपोल का वह प्रमुख चीन के कब्जे में है। चीन ने दुनिया को यह बताने की जरूरत भी नहीं समझी थी कि उसने इंटरपोल के एक प्रमुख को क्यों और कैसे अपने कब्जे में रखा हुआ है। दुनिया के नियामकों भी चीन को कुछ नहीं बिगाड़ सकती हैं? आखिर क्यों? इसलिए कि चीन के पास सुरक्षा परिषद के बीटो का अधिकार है। अभी-अभी अमेरिकी राष्टपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने नागरिकों को चीन जाने से मना किया है।

अमेरिका और चीन के बीच में टेड वार कितना गंभीर और खतरनाक रहा है, यह भी जगजाहिर है। चीन का युद्धोन्माद क्या है? चीन का युद्धोन्माद से दुनिया की शांति को कितना खतरा है? चीन का युद्धोन्माद क्या पड़ोसियों के लिए खतरे की घंटी हैं? क्या पड़ोसियों के सामने भी चीन के खिलाफ अपनी सेना मजबूत करने की बाध्यता होगी? ताइवान के सामने अस्तित्व संकट है क्या? वियतनाम, फिलीपींस और कंबोडिया जैसे आसियान देशों के सामने भी युद्ध की कोई चुनौती खड़ी होती है क्या? चीन के युद्धोन्माद से भारत को भी डरना चाहिए क्या?

अगर पड़ोसी देश भी अपनी सेना को आक्रामक ढंग से मजबूत करने लगेंगे और नए-नए हथियारों का सृजन और खरीद करने लगेंगे तो फिर दुनिया के अंदर खतरनाक हथियारों की होड़ नहीं बढेÞगी क्या? हथियारों की होड़ से दो प्रकार के खतरे होते हैं। एक तो हथियारों की होड़ से शांति को खतरा होता है, हिंसा-प्रतिहिंसा की आशंका उत्पन्न होती है और दूसरे में हथियारों के सृजन और खरीद से अर्थव्यवस्था चौपट होती है। जिन पैसों का उपयोग गरीबी उन्मूलन और जरूरी सुविधाओं के विकास पर खर्च होना होता है उन पैसों से हथियारों का उन्नयन और क्रय होता है।चीन के युद्धोन्माद पर अब एक चर्चा करते हैं। चीन के राष्टÑपति जिनपिंग ने अपनी सेना को स्पष्ट रूप से आदेश दिया है

कि युद्ध के लिए तैयारी करनी चाहिए। शी जिनपिंग ने अपनी आर्मी पीपुल्स लिबरेशन से कहा है कि दुनिया में कई ऐसे प्रश्न है जिस पर विवाद बढ़ रहा है, टकराव बढ़ रहा है, हितों का संकट खड़ा है, ऐसे में चीन को युद्ध के लिए तैयार रहना चाहिए। पीपुल्स लिबरेशन  आर्मी अपने हथियारों का उन्नयन करे, सैनिकों का प्रशिक्षण नए सिरे से करे और दुनिया को यह अहसास कराए कि वह सर्वश्रेष्ठ सामरिक शक्ति है। सिर्फ इतना ही नहीं बल्कि चीन अपने मारक और खतरनाक हथियारों का प्रदर्शन कर दुनिया को डराना भी चाहता है, दुनिया को भयभीत करना चाहता है। चीन अपने स्थापना के 70वीं वर्षगांठ पर बैजिंग के थियानमेन चौक पर पीपुल्स लिबरेशन आर्मी सैन्य परेड करेगी।

इस सैन्य परेड में दुनिया को चकित करने वाले हथियारों का प्रदर्शन किया जाएगा। थियानमेन चौक को ही सैन्य परेड के लिए क्यों चुना गया। थियानमेन चौक दुनिया भर में चर्चित है और चीन की कठोर, दमनकारी और हिंसक सैन्य शक्ति के लिए भी कुख्यात है। 20 शताब्दी में चीन ने लोकतंत्र की मांग करने वाले करीब 20 हजार से ज्यादा छात्रों की हत्या टैंकों और मिसाइलों से की थी। लोकतंत्र की मांग करने वाले चीनी छात्रों का वह नरसंहार दुनिया के लिए आज भी दिल दहला देने वाली घटना है।

- विष्णुगुप्त


 

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