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र्इंट का जवाब पत्थर और भाषा की मर्यादा

Wednesday, December 05, 2018 09:35 AM

गांधी जी कहा करते थे कि अगर र्इंट का जवाब पत्थर से दिया गया तो एक दिन यह पूरी दुनिया खत्म हो जाएगी। गांधी जी की यह बात रोजमर्रा के जीवन से लेकर सियासत तक में पूरी तरह लागू होती है। क्योंकि होता यही है कि र्इंट का जवाब पत्थर से देने में हम कब अपनी मर्यादा लांघ जाते हैं, हमें पता ही नहीं चलता। बाजार ने इस बात को नई शब्दावली के साथ किलर इंस्टिंग्ट का नाम दिया है। और रफ्ता रफ्ता यह किलर इंस्टिंग्ट इस कदर हमारे जेहन पर हावी होने लगता है कि हम बोलचाल और भाषा की आम मर्यादा का भी ख्याल नहीं रखते।

और खासतौर से यह किलर इंस्टिंग्ट चुनावों में यों सिर चढ़कर बोलता है कि हमारी भाषा की सारी मर्यादा धरी की धरी रह जाती है। हर पांच साल में विधानसभा और लोकसभा के लिए चुनाव होते ही हैं, लेकिन चुनाव दर चुनाव हम एक लोकतांत्रिक मुल्क और समाज के तौर पर भाषा की मर्यादा के सवाल पर कुछ पायदान नीचे ही चले जा रहे हैं। फिलहाल मुल्क में पांच सूबों की विधानसभा चुनाव चल रहा है। छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश और मिजोरम में हो चुका है राजस्थान और तेलंगाना में बाकी है। लिहाजा तमाम पार्टियों ने इन्हीं सूबों में पूरे किलर इस्टिंग्ट के साथ जोर लगा रखा है। और इस जोर आजमाईश में अक्सर भाषा की मर्यादा तेल लेने चली जा रही है।

पिछले दिनों एक खबरिया चैनल के चुनावी शो में भाजपा के प्रवक्ता गौरव भाटिया और कांग्रेस की महिला प्रवक्ता रागिनी नायक इस कदर गाली गलौज पर उतर आर्इं कि चुनावी सौ गली मुहगों की तू-तू मैं-मैं में तब्दिल हो गया। गौरव भाटिया ने कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को चपरासी बता डाला। तो, रागिनी नायक भड़क उठीं। उनने तैश में कह डाला कि तू और तेरा बाप चपरासी होगा। रागिनी नायक को अपन अधिक नहीं जानते, पर जितना जानते हैं अपनी नजर में वे एक सभ्य और तहजीब वाली महिला रही हैं।

पर, मुमकिन है उनका यह भड़कना ईंट का जवाब पत्थर से देने भर की कवायद रही हो। तकरीबन ऐसी ही एक घटना राजस्थान के बांसवाड़ा में हुई, जब गुजरात से भाजपा सांसद देवजी भाई ने कह डाला कि पप्पू को बुलाओ, पप्पू गड्ढे भरेगा। उनका इतना कहना था कि कांग्रेस की एक स्थानीय पार्षद सीता दामोड़ ने कड़ा प्रतिरोध जताया तो स्थानीय लोग भी उनके बात का समर्थन किया। मामला बिगड़ते देख देवजी भाई को माफी मांगनी पड़ी। राजस्थान में भाजपा की नेता शोभा चौहान का एक वीडियो वायरल हुआ है, जिसमें वे लोगों से वोट की अपील करते हुए कहती हैं कि अगर वो सत्ता में आती हैं तो इस बात को सुनिश्चित करेंगी कि बाल विवाह का विरोध न हो और पुलिस का हस्तक्षेप न हो।

पिछले कुछ सालों से चुनावी प्रचार में गोया होड़ इस बात की होती है कौन कितना नीचे गिरकर अपने विरोधी पर प्रहार कर सकता है। और इस होड़ में छुटभैया नेता से लेकर बड़े-बड़े नेता भी शामिल हो जाते हैं। राजस्थान में सीपी जोशी ने ब्राह्मणों को ही धर्म पर बात करने का अधिकारी बताया था साथ ही नरेन्द्र मोदी, उमा भारती की जाति पर सवाल किए थे। पर राहुल गांधी के हस्तक्षेप के बाद उनने अपना बयान वापस ले लिया था। हाल ही में तेलंगाना के चुनाव प्रचार में उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी ने कहा कि अगर सूबे में भाजपा की सरकार बनती है तो असदुद्दीन ओवैसी को तेलंगाना से उसी तरह भागना पड़ेगा, जिस तरह से हैदराबाद के निजाम भागे थे।

इस पर ओवैसी ने भी पलट कर योगी को इतिहास का ज्ञान करा दिया कि निजाम हैदराबाद छोड़कर नहीं गए, उनको राजप्रमुख बनाया गया था और चीन से जंग हुई तो इन्हीं निजाम ने अपना सोना बेच दिया था। पिछले आम चुनावों में भी केन्द्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने भाजपा के विरोधियों को पाकिस्तान भेजने की धमकी भरी नसीहत दी थी। गुजरात चुनाव में मणिशंकर अय्यर ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के लिए ‘नीच’ शब्द का इस्तेमाल किया था। मुल्क के प्रधानमंत्री के लिए इस तरह की अशोभनीय टिप्पणी नहीं होनी चाहिए।

लेकिन प्रधानमंत्री मोदी खुद इन टिप्पणियों का सियासी लाभ उठाने की कोशिश करते दिखते हैं और जहां जैसी जरूरत हो, अपनी जाति या बचपन की गरीबी को भुनाते सुने जा सकते हैं। चुनाव में किसी के हिस्से हार, किसी के हिस्से जीत आएगी ही, लेकिन जीतने वाला अगर हारने वाले को हर लिहाज से नेस्तनाबूद करने देने पर आमादा नजर आने लगे, तो यकीनन यह लोकतंत्र का तकाजा नहीं है। यह बात न प्रक्रियात्म लोकतंत्र के लिहाज से सही है और न व्यवहार यानी मन के लोकतंत्र के लिहाज के लिए ही मुफीद है। असल में समस्या की वजह भी यही है।

हम प्रक्रिया की डेमोक्रैसी को तो अपना चुके हैं, पर हम मन से लोकतांत्रिक होने का तरीका नहीं सीख पा रहे हैं। नतीजन हम हर र्इंट के जवाब के लिए पत्थर खोजने लग जाते हैं। पत्थर खोजने की इस तहजीब ने समाजिक और सियासी मर्यादा को कई पायदान नीचे ले जाकर खड़ा कर दे रहा है।
-शिवेश गर्ग

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