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चुनावी साल का पहला साक्षात्कार

Friday, January 04, 2019 08:40 AM

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी

- शिवेश गर्ग
पिछले दिनों पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का यह बयान कि मैं पत्रकारों से नहीं डरता था, बेहद चर्चा में रहा। उनके इस बयान को मौजूदा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर तंज के तौर पर देखा गया था। क्योंकि उनने अपने पूरे कार्यकाल यानी पिछले पांच साल में कभी कोई प्रेस कांफ्रेंस नहीं की है। इस बात पर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी भी इन दिनों उन्हें चुनौती देने का कोई मौका नहीं छोड़ रहे। अगर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी मीडिया का सामना न कर पाने के सवाल पर विपक्ष के तंज के शिकार हो रहे हैं तो इसकी वाजिब वजह भी है। यह सच है कि उनने किसी प्रेस कांफ्रेंस में मीडिया का कभी सामना नहीं किया। वैसे उनने गाहे-बगाहे कुछ अपने समझे जाने वाले चुनिंदा पत्रकारों के सवालों पर रटे-रटाए जवाब जरूर दिए हैं जो तमाम खबरिया चैनलों और अखबारों में एकालाप की तरह छपते रहे हैं।

मुल्क ने एक ऐसा ही एकालाप एक जनवरी को भी देखा। पर अबके और बार की तरह सवाल पूछने के लिए किसी खबरिया चैनल के पत्रकार या किसी अखबार के संपादक को नहीं, अलबत्ता एक समाचार एजेंसी की महिला संपादक को चुना गया। प्रधानमंत्री का साक्षात्कार 95 मिनट लंबा था। साक्षात्कार देख कर साफ था कि संपादक महोदया को सवाल के पूरक सवाल पूछने की इजाजत नहीं बख्शी गई थी। सवाल तो उनके जवाब भी थे पर जो कहा गया था उसे सिर हिलाकर सुन लिया जाता रहा। अलबत्ता, यह जरूर था कि और बार से इतर सवाल जरूर कुछ तल्ख थे।

पर उनके जवाब नए नहीं थे। जवाब वही थे जो तमाम चुनावी रैलियों में प्रधानमंत्री राफेल, नोटबंदी, जीएसटी, तीन तलाक और राम मंदिर सरीखे मुद्दों पर बोलते रहे हैं। लिहाजा, तकरीबन डेढ़ घंटे के मुल्क के प्रधानमंत्री के साक्षात्कार में खबरनवीसों को ले-देकर एक ही शै हाथ लग सकी जिसे खबर कहा जा सकता था। और वह था राम मंदिर के सवाल पर उनका यह कहना कि न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने पर ही अध्यादेश लाने पर विचार किया जाएगा। प्रधानमंत्री ने साथ में यह कहना भी लाजमी समझा कि न्यायिक प्रक्रिया में उन्हें पूरा भरोसा है।

लिहाजा, संपादक महोदया की ओर से एक सवाल यहां जरूर बनता था कि प्रधानमंत्री के तौर पर एक ऐतिहासिक इमारत को तोड़ डालने की घटना को वे किस रूप में देखते हैं। क्या वे इस घटना को संविधान की मूल भावना के खिलाफ मानते है या नहीं। फिर तीन तलाक के सवाल पर भी मुस्लिम महिलाओं के लिए प्रधानमंत्री का दर्द छलकता नजर आया। पर संपादक महोदया ने यह पूछना मुनासिब नहीं माना कि अगर उन्हें मुल्क की न्यायिक प्रक्रिया में भरोसा है और महिलाओं के दर्द को इस कदर महसूस करते हैं तो सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश के सवाल पर उनकी पार्टी का रवैया अदालत और संविधान के खिलाफ क्यों है।

तमाम ऐसे सवालों की चर्चा छेड़ी जा सकती थी, जिनका जवाब मुल्क अपने प्रधानमंत्री से सुनना चाहता है। पर संपादक महोदया को गोया डर हो कि प्रधानमंत्री कहीं नाराज न हो जाएं और पुड्डुचेरी को बन्नकम जैसी घटना न दोहराई जाए। पर जो खबर आ रही है उसके मुताबिक संपादक महोदया डरी नहीं थीं वे नए साल के इस मौके पर प्रधानमंत्री की ओर से धमाका किए जाने की योजना में अपना महति योगदान दे रही थीं। पीएमओ के सूत्रों के मुताबिक ऊपर से ब्रीफिंग साफ थी कि साल के पहले दिन से ही तहलका मचना चाहिए। मुल्क के हर टेलीविजन चैनल पर प्रसारित होने वाले साक्षात्कार की हर बात बड़ी बारीकी से तैयार की गई थी।

मसलन, आइडिया से लेकर प्रमोशन तक, इंटरव्यू की रिकॉर्डिंग के वक्त से लेकर टेप के रिलीज के समय तक हर चीज। और सूत्र तो यह भी दावा कर रहे हैं कि सारा आइडिया खुद प्रधानमंत्री का था। प्रधानमंत्री इस बार चाहते थे कि जनता तक पहले से खबर हो कि उनका बड़ा इंटरव्यू आने वाला है। इसलिए 31 तारीख को सिर्फ रिकॉर्डिंग हुई और फिर पत्रकारों को केवल इसकी खबर मिली। साक्षात्कार का प्रसारण कब होगा, यह किसी को नहीं बताया गया था। लिहाजा, 31 दिसंबर के शाम खबरिया चैनलों के दफ्तरों में साक्षात्कार को लेकर एक रहस्यमयी सरगर्मी महसूस की गई। गोया, यह मुल्क के प्रधानमंत्री का कोई साक्षात्कार न हो कोई खुफिया टॉप सिक्रेट हो।

बहरहाल, रहस्य तकरीबन दस बजे टूटा और पता चला कि साक्षात्कार का प्रसारण 2018 की अंतिम तारीख को नहीं अलबत्ता, चुनावी साल 2019 के आगाज के साथ होगा। पर एक जनवरी को कब होगा यह तब भी रहस्य ही रहा। पर जब नए साल में सूरज की पहली रौशनी फूटी तो एक अनहोनी घटना हो गई। अभिनेता कादर खान का कनाडा में निधन हो गया और उनके निधन की खबर सोशल मीडिया में ट्रैंड करने लगी। लिहाजा, साक्षात्कार का समय टालना पड़ा। बहरहाल, देर शाम साक्षात्कार का प्रसारण संभव हो सका। सूत्र तो यह भी बताते हैं कि साक्षात्कार के सवाल और उसके जवाब पूरी स्क्रिप्ट एक दिन पहले ही जानकारों के एक दल ने तैयार की थी। पर इतनी तैयारी और तमाम रहस्य रोमांच के बाद जब पहली तारीख को साक्षात्कार जब मुल्क के सामने नमूदार हुआ, तो हंगामा क्या बरपता, ठंड में ठिठुरा एक पत्ता भी न हिला। अलबत्ता, दूसरे दिन अखबारों में पीएम के हवाले से यह खबर जरूर छपी थी कि राम मंदिर पर अदालत के फैसले से पहले मंदिर निर्माण के सवाल पर सरकार विचार नहीं करेगी।                                          
     (ये लेखक के अपने विचार हैं)

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