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बेगार नहीं हैं किसान

Saturday, January 05, 2019 09:10 AM

- शिवेश गर्ग
इसे अब क्या माना जाए, किसानों के साथ भद्दा मजाक या उनकी बदनसीबी कि उत्तर प्रदेश में आगरा के एक किसान प्रदीप शर्मा ने जब अपनी पैदावार 19000 किलो यानी 19 टन आलू बेचा तो उन्हें महज 490 रुपए मिले। इस बात से नाराज होकर उनने पूरी राशि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को मनी आॅर्डर के जरिए भेज दी। खबर के मुताबिक आगरा के बरौली अहीर क्षेत्र के नगला नाथू गांव के पीड़ित किसान प्रदीप शर्मा पीएम को मनी आॅर्डर भेजने के बाद कहते हैं कि ‘आलू उगाने के दौरान मुझे साल-दर-साल नुकसान होता रहा है। मुझे जुलाई में राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री से इच्छामृत्यु की अनुमति लेने के लिए पत्र लिखा था, लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला।’ प्रदीप शर्मा पहले किसान नहीं हैं

जिनने अपनी पैदावार का कम दाम मिलने पर नाराज होकर प्रधानमंत्री को पैसा मनीआॅर्डर किया हो। महाराष्ट्र के नासिक जिले के संजय साठे नाम के किसान को अपने 750 किलो प्याज महज 1.40 रुपए प्रति किलो के हिसाब से बेचनी पड़ी। उनने प्याज बेचने के बाद मिले 1064 रुपए को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भेज दिया था। अंडरसुल के निवासी चंद्रकांत भीकन देशमुख ने भी प्याज का कम दाम मिलने पर मुख्यमंत्री देवेद्र फड़णवीस को 216 रुपए का मनी आॅर्डर भेजा था। अपन नहीं जानते कि प्रदीप शर्मा, संजय साठे और चंद्रकांत देशमुख की ओर भेजा गया मनी आॅर्डर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को मिला या नहीं। और मिला भी हो तो मनी आॅर्डर पाकर उनने क्या महसूस किया हो।

पर एक जनवरी को प्रधानमंत्री के साक्षात्कार में किसानों और कर्जमाफी के सवाल पर उनकी बातों से यह अंदाजा तो लगाया ही जा सकता है कि मुल्क भर के किसानों की समस्या अब भी उनकी प्राथमिकता में शामिल नहीं हो सकी है। किसानों की समस्या के बरक्स पूछे गए सवालों के बरक्स उनका कहना है कि कृषि ऋण माफी के बारे में फैसला लेने के लिए कोई भी राज्य सरकार स्वतंत्र है लेकिन उनकी अपनी सरकार का ध्यान किसानों को सशक्त करने पर है। यानी उनकी बातों से इतना अंदाजा तो लगता ही है कि वे किसानों की ऋण माफी की मांग को गंभीरता से नहीं ले रहे। उनने दलील दी है कि अतीत में भी कई बार किसानों के कर्ज माफ किए गए हैं लेकिन किसानों की कर्ज संबंधी समस्या अब भी बनी हुई है।

तीन सूबों के विधानसभा चुनाव में अपनी पार्टी की सत्ता खोने के बाद भी न जाने क्यों प्रधानमंत्री यह नहीं समझ पा रहे कि पहले और अब की स्थिति में बहुत फर्क है। यह भी गौर करने वाली बात है कि मुल्क भर के किसान उनकी पैदावार का उचित मूल्य नहीं मिलने पर अपनी नाराजगी जाहिर करने के लिए आखिर नरेन्द्र मोदी को ही मनी आॅर्डर क्यों भेज रहे हैं। लाजमी है कि किसानों की हालत आज जो बद से बदतर हुई है, उसके लिए खुद प्रधानमंत्री की ओर से ली गई नोटबंदी और जीएसटी जैसे विनाशकारी आर्थिक नीतियां जिम्मेदार हैं।

यह सच है कि मुल्क भर में किसानों को पहले भी उनके उपज का उचित मूल्य नहीं मिलता रहा है पर पहले नोटबंदी और जीएसटी जैसे घातक फैसलों ने किसानों की हालत बेहद दयनीय कर दी है। दूसरी ओर, मुल्क के किसान यह भूले नहीं हैं कि 2014 में नरेन्द्र मोदी ने किसानों के क्या क्या वादे किए थे। प्रधानमंत्री ने खुद पांच साल के अंदर स्वामीनाथन कमेटी की सिफारिश लागू करने और किसानों की आय दोगुनी करने का वादा किया था। आगरा के किसान प्रदीप शर्मा ने प्रधानमंत्री को भेज गए मनी आॅर्डर में उनके इन वादों को भी याद दिलाया है।

प्रधानमंत्री अपने साक्षात्कार में कहते हैं कि उनकी सरकार का ध्यान किसानों को सशक्त करने पर है। पर उनके पांच साल के कार्यकाल में किसानों ने जो उनकी सरकार को करते देखा है वह तो कुछ और ही है। जहां एक ओर, मुल्क के वित्त मंत्री राज्यों को विभिन्न फसलों की एमएसपी को न बढ़ाने और उस पर मिलने वाले बोनस के लिए केन्द्र से पैसा न मांगने की बात करते सुने गए वहीं, दूसरी ओर जनता ने देखा कि मोदी सरकार कुछ चुने हुए पूंजीपतियों के पक्ष में अपनी प्रतिबद्धता दिखाती रही। और साथ में नोटबंदी और जीएसटी जैसे मनमाने आर्थिक फैसले कर डाले, जिसका सीधा असर किसानों की आय पर पड़ा। नतीजनत, मुल्क भर में किसानों को सड़कों पर उतर कर आंदोलन करना पड़ा।

यह सही है कि कर्ज माफी किसानों की समस्या का असली समाधान नहीं है। पर यह भी समझने की जरूरत है कि मोदी सरकार की नीतियों ने किसानों की समस्या को बेहद गंभीर कर डाला है। ऐसे में कर्ज माफी किसानों के लिए फौरी राहत होगी। यह आज समय की जरूरत है। कर्ज माफी का सीधा असर न केवल किसानों की आर्थिक हालत पर होगा, अलबत्ता यह मुल्क की अर्थव्यवस्था के लिए भी मददगार साबित होगा। जहां तक इस दलील का सवाल है कि कर्ज माफी से बैंकिंग व्यवस्था की हालत खराब होगी, तो राहुल गांधी का यह सवाल मौजूं है

कि आखिर पूंजीपतियों का कर्ज माफ करने से क्या बैंकिंग व्यवस्था प्रभावित नहीं होती। अर्थव्यवस्था के विकास में अगर पूंजीपतियों का योगदान है तो मोदी सरकार को यह समझना होगा कि मुल्क के किसान भी कोई बेगारी नहीं करते। प्रदीप शर्मा ने 19 टन आलू केवल खुद के खाने के लिए नहीं उगाए थे।
 

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