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दिनोंदिन बढ़ती जा रही है फिजियोथैरेपी की मांग

Sunday, August 19, 2018 12:05 PM

प्रतीकात्मक तस्वीर

लगातार बेहतर होती स्वास्थ्य सेवाओं में फिजियोथैरेपी की भी अपनी बड़ी भूमिका है। लब्बोलुआब यह कि फिजियोथैरेपिस्ट की मांग दिनोंदिन बढ़ रही है। इसलिए इस क्षेत्र को एक बेहतर कॅरिअर विकल्प के रूप में चुना जा सकता है।

आज की तारीख में देश में 5 लाख से ज्यादा फिजियोथैरेपिस्ट हैं और इन सबके पास खूब काम है। जो इस बात का सबूत है कि इस फील्ड में कॅरिअर की बहुत अच्छी संभावनाएं हैं। इस क्षेत्र में अभी बहुत बड़ी संख्या में प्रोफेशनल्स की जरूरत है। एक अनुमान के मुताबिक साल 2022 तक हिंदुस्तान को कम से कम 20 लाख सक्रिय फिजियोथैरेपिस्ट की जरूरत पड़ेगी।

कहने का मतलब यह है कि अगर इस क्षेत्र में कॅरिअर की राह तलाशी जाए तो मंजिल का मिलना 100 फीसदी तय है।
वास्तव में पूरी दुनिया में लोकप्रिय यह एक हेल्थकेयर प्रोफेशन है।

आमतौर पर अक्षम या किसी दुर्घटना के चलते चोटिल हो गये शारीरिक अंगों को दोबारा ठीक करने, उन्हें गति प्रदान करने आदि में फिजियोथैरेपी विधि का बहुत सकारात्मक उपयोग है।

फिजियोथैरेपी में तरह-तरह की मसाज, एक्सरसाइज और कुछ उपकरणों की मदद से ऊष्मा, रेडिएशन, पानी, इलेक्ट्रिकल एजेंट्स आदि के जरिए  शरीर की क्षतिग्रस्त मांसपेशियों, जोड़ों और हड्डियों को ठीक करने का काम किया जाता है।

जहां तक इस क्षेत्र में संभावनाओं का सवाल है तो एक फिजियोथेरेपिस्ट को सबसे पहले तो किसी भी अस्पताल में नौकरी मिल जाती है। फिर चाहे वह आईसीयू हो या फिर जेरीएट्रिक्स।

फिजियोथैरेपिस्ट की जिंदगी में तरक्की की भरपूर संभावनाएं होती हैं। जहां तक फिजियोथैरेपिस्ट बनने के लिए कोर्स यानी पाठ्यक्रम का सवाल है तो इसके लिए अलग-अलग अवधि के पाठ्यक्रम मौजूद हैं।

एक पाठ्यक्रम 4 वर्षीय बैचलर कोर्स इन फिजियोथेरेपी (बीपीटी) है, जिसमें 6 महीने की इंटर्नशिप भी शामिल है। थैरेपी के क्षेत्र में इन दिनों आॅक्युपेशनल थैरेपिस्ट की बाजार में बहुत जरूरत है।

इस थैरेपी के जरिए अस्वस्थ मरीजों को शारीरिक तौरपर स्वस्थ और आत्मनिर्भर बनाने का प्रयास किया जाता है। इसके जरिये बच्चों में कॉग्निटिव, फिजिकल और मोटर स्किल्स विकसित की जाती हैं। इस उपचार में हैंडीक्राफ्ट्स, मैनुअल और इंडस्ट्रियल आर्ट, रिक्रिएशन और रोजमर्रा की गतिविधियां भी शामिल होती हैं।

इसके लिए आॅक्युपेशनल थैरेपी में बीएससी में 4 वर्षीय कोर्स कराया जाता है।   जहां तक थैरेपिस्ट के लिए रोजगार का सवाल है तो उन्हें कई जगहों में विशेषकर रोजगार दिया जाता है।

ये खास जगहें हैं- आॅक्युपेशनल थैरेपिस्ट अस्पताल, रिहेबिलिटेशन सेंटर, डायग्नोस्टिक सेंटर आदि। इसके अलावा आप चाहें तो इस फील्ड में स्वतंत्र काम भी कर सकते हैं।

सैलरी
यह अलग-अलग श्रेणी के शहरों में अलग अलग है। कहीं 8 से 10 हजार रुपये में ही कॅरिआ की शुरूआत होती है तो कहीं पर यह 20 से 25 हजार रुपये और कई बार इससे भी ज्यादा की वेतन का जरिया बन जाता है। वास्तव में इस क्षेत्र में भी वेतन के पीछे कई कारक होते हैं- आप कहां काम करते हैं, क्या काम करते हैं?

क्या आप बड़ी समझदारी से तमाम शारीरिक अंगों की बेहतरी के लिए कोई सहज और सरल एक्सरसाइज का तरीका विकसित कर सकते हैं। अगर हां, तो आपको इस क्षेत्र में शुरूआती सैलरी भी 30 से 40 हजार रुपये मिल सकती है। सबसे अच्छी बात यह है कि इस फील्ड में इंटर्नशिप के दौरान ही छात्रों को पैसे मिलने लगते हैं। इस क्षेत्र में जाने के लिए न्यूनतम योग्यता 10+2 है और ये पाठ्यक्रम इन तमाम इंस्टीट्यूट से किया जा सकता है। 

 देश के महत्वपूर्ण इंस्टीट्यूट

 निजाम इंस्टीट्यूट आॅफ मेडिकल साइंसेस, तेलंगाना
  एसडीएम कॉलेज आॅफ फिजियोथेरेपी, कर्नाटक
  महात्मा गांधी यूनिवर्सिटी आॅफ मेडिकल एजुकेशन, केरल
  के जे सोमाया कॉलेज आॅफ फिजियोथेरेपी, मुंबई
  डिपार्टमेंट आॅफ फिजिकल मेडिसिन एंड रिहैबिलिटेशन, तमिलनाडु
  जे एस एस कॉलेज आॅफ फिजियोथेरेपी, मैसूर
  अपोलो फिजियोथेरेपी कॉलेज, हैदराबाद
  पं दीनदयाल उपाध्याय इंस्टिट्यूट फॉर फिजिकली हैंडिकैप्ड, नई दिल्ली
  इंडियन इंस्टीट्यूट आॅफ हेल्थ एजूकेशन एंड रिसर्च, पटना
  पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट आॅफ मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च, चंड़ीगढ़

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