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लाइलाज नहीं है मिर्गी, जादू-टोने से बचें

Monday, February 11, 2019 12:15 PM

जयपुर। मिर्गी ऐसा रोग है जिसके होने पर मरीज को डॉक्टर के पास ले जाने के बजाए सबसे पहले जादू टोने से ठीक करने की कोशिश की जाती है। लेकिन तब तक काफी बे्रन डैमेज हो चुकी होती है। डब्ल्यूएचओ के अनुसार विश्व में करीब 50 लाख लोग मिर्गी रोग से पीड़ित हैं जिसमें से 80 प्रतिशत लोग विकासशील देशो में रहते हैंं। मॉर्डन लाइफ स्टाइल युवाओं को मिर्गी का रोगी बना रहा है। काम को अगले दिन पर टालना, रात को देर से सोना, तनाव से बचने के लिए शराब व धू्रमपान का सेवन करना इसी बीमारी की कुछ वजह है।

समय पर इलाज नहीं होने पर यह घातल रूप भी ले सकती है। मिर्गी किसी आयु के व्यक्ति को हो सकती है। कुछ प्रकार की मिर्गी बचपन में होती है, कुछ इसके बाद समाप्त हो जाती है। लगभग 70 प्रतिशत बच्चे जिनको बचपन में मिर्गी थी बड़े होने पर इससे छुटकारा पा जाते हैं। कुछ मिर्गी के दौरे ऐसे भी होते हैं जैसे फेब्राइल दौरा जो बचपन में केवल बुखार के दौर आते हैं और बाद में कभी नहीं।

मिर्गी को लेकर फैली भ्रांतियां
मिर्गी को लेकर लोगों में कई तरह की भ्रांतियां फैली होती हैं, लेकिन यह ऐसा रोग है जिसमें मस्तिष्क की विद्युतीय प्रक्रिया में व्यवधान पड़ने से शरीर के अंगों में दौरा पड़ने लगता है। मिर्गी का दौरा पड़ने पर शरीर अकड़ जाता है, आंखों की पुतलियां उलट जाती है। हाथ-पैर और चेहरे की मांसपेशियों में खिंचाव होता है।

मिर्गी के लक्षण
मिर्गी के मुख्य कारणों में सिर पर चोट लगना, दिमागी बुखार आना, दिमाग में कीड़े की गांठ बनना, बे्रन टयूमर और ब्रेन स्ट्रोक शराब या नशीली दवाइयों का ज्यादा इस्तेमाल करना आदि शामिल है। इसके साथ बात करते हुए रोगी अचानक शून्य में चला जाता है, शरीर के किसी अंग का फड़कना, तेज रोशनी से आंखों में परेशानी होती है, मरीज अचानक बेहोश हो जाता है, मांसपेशियों पर उसका नियंत्रण नहीं रहता।

दौरा पड़ने पर यूं रखें खयाल 
दौरा पड़ने के बाद मरीज का ध्यान रखना बहुत जरूरी है। रोगी को उस समय किसी सुरक्षित स्थान पर लेकर एक करवट लेटा दे। खुली हवा में सांस आने दें। रोगी के आस-पास भीड़ ना लगने दे और सिर के नीचे मुलायम कपड़ा रखें। मिर्गी के दौरे के समय रोगी के मुंह में कुछ ना डाले।

मिर्गी दो प्रकार की होती है
आंशिक मिर्गी में दिमाग के एक भाग में दौरा पड़ता है। व्यापाक मिर्गी में दिमाग के पूरे भाग में दौरा पड़ता है। 2 से 3 साल तक दवाइयां खाने से मिर्गी की बीमारी ठीक हो जाती है। सिर्फ कुछ लोगों को ही मिर्गी की दवाइयां शुरू करनी चाहिए। उन्होंने कहा सिर्फ 10 से 20 फीसदी को ही आपरेशन की जरूरत पड़ती है। ब्रेन टयूमर और ब्रेन हैमरेज से भी मिर्गी होने का खतरा रहता है।
- डॉ. एस. पाटीदार, वरिष्ठ न्यूरोलॉजिस्ट 

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