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छिल गई दिल की महाधमनी, बिना चीरफाड़ ग्राफ्ट डाल बचाई जान

Friday, August 17, 2018 14:30 PM

डॉ. निखिल चौधरी

जयपुर। हाई ब्लड प्रेशर खतरनाक तो है ही, कई बार इसके कारण जटिलताएं बढ़ जाती हैं। ऐसा ही एक दुर्लभ व जटिल केस हाल ही नारायणा मल्टीस्पेशियलिटी हॉस्पिटल, जयपुर में सामने आया, जिसमें हाई बीपी के कारण एक मरीज के दिल की महाधमनी छिल गई और नस की दीवार के अंदर खून जाने लगा। ऐसे जटिल केस में सर्जरी बहुत रिस्की थी, तो एंडोवेस्कुलर ट्रीटमेंट किया और विशेष एओर्टिक स्टेंट ग्राफ्ट डाल कर मरीज की जान बचाई।

जयपुर जिले के 55 वर्षीय श्रवण लाल (बदला नाम) को पिछले दिनों अचानक पीठ में तेज दर्द हुआ, बाद में यह असहनीय दर्द पेट तक जा पहुंचा। बीमारी पकड़ में नहीं आने पर नारायणा हॉस्पिटल की इमरजेंसी में मरीज को लाया गया। डॉक्टरों ने मरीज की सीटी स्केन जांच कराई तो सामने आया कि दिल की महाधमनी (एओर्टा) नस छिल गई है। इसे टाइप-बी एओर्टिक डिसेक्शन कहते हैं।

महाधमनी छिलने से खून का प्रवाह प्रभावित हो गया था और खून आंतों व पैरो में जाने के बजाय, एओर्टा नस की दीवार के अंदर जा रहा था। आंतों को पर्याप्त खून नहीं मिल पा रहा था जिसके परिणामस्वरूप मरीज को पेट में तेज दर्द होने लगा। खून न मिलने के कारण पेट की तीन में से दो आर्टरी (नस) बंद हो गई थी।  

एंडोवेस्कुलर ट्रीटमेंट अपनाया
नारायणा मल्टीस्पेशियलिटी हॉस्पिटल के कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. निखिल चौधरी ने बताया कि मरीज का बीपी एकदम से 200 तक पहुंचने से महाधमनी (एओर्टा नस) छिल गई। केस दुर्लभ और जटिल था, ऐसे में सर्जरी करना जोखिम भरा और जानलेवा साबित हो सकता था। हमने दिल्ली स्थित हमारे विजिटिंग कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. हेमंत मदान से सलाह ली और एंडोवेस्कुलर ट्रीटमेंट की योजना बनाई। सीनियर कार्डियक सर्जन डॉ. सैफी आरसीवाला की मदद से पैरों की आर्टरी में हल्का सा चीरा लगाया ताकि कैथेटर को पैरों की नस के माध्यम से महाधमनी में डाला जा सके। तार डाल कर छाती तक गए और विशेष प्रकार का एओर्टिक स्टेंट ग्राफ्ट लगा कर नस की दीवार में खून जाने का जो गलत रास्ता बन गया था, उसे बंद कर दिया। खून का गलत रास्ता बंद करने से अपने आप ही आंतों में पर्याप्त खून जाने लगा जिससे मरीज बिल्कुल ठीक हो गया। इस प्रक्रिया को थोरोसिक एंडोवेस्कुलर एओर्टिक रिपेयर के नाम से भी जाना जाता है जो एओर्टेक एन्युरिज्म के मरीजों में भी कारगर रहती है।

नहीं होता इलाज तो आंतें सढ़ जातीं
इलाज के बाद मरीज को चार दिन बाद छुट्टी दे दी गई और अब वह पूरी तरह ठीक है। डॉ. निखिल ने बताया कि  मरीज का समय पर इलाज नहीं किया जाता और सामान्य दर्द समझ कर अनदेखा कर देते तो उसकी आंतें सढ़ जाती, गैंगरीन हो जाती क्योंकि आंतों को पर्याप्त खून नहीं मिल रहा था। उन्होंने बताया कि इस तरह का रिस्क हाई बीपी व धूम्रपान करने वालों में ज्यादा रहता है।
- डॉ. निखिल चौधरी
 

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