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संपादकीय

माल्या पर सख्ती

Tuesday, January 08, 2019 09:40 AM

विजय माल्या (फाइल फोटो)

कई बैंकों से नौ हजार करोड़ रुपये से अधिक का कर्ज लेकर भागे शराब कारोबारी विजय माल्या को प्रिवेंशन आॅफ मनी लांड्रिंग एक्ट (पीएमएलए) अदालत ने शनिवार को भगोड़ा आर्थिक अपराधी घोषित कर दिया। माल्या पहले ऐसे कारोबारी हैं जिन्हें नए बने इस एक्ट के तहत भगोड़ा घोषित किया गया है। माल्या के भगोड़ा घोषित होने से सरकार को उसकी देश-विदेश स्थित सम्पत्तियों को जब्त करने का अधिकार मिल सकेगा। देश के कई राज्यों में माल्या की कई सम्पत्तियां हैं। माल्या बैंकों का कर्ज चुकाए बिना ही मार्च 2016 में लंदन भाग गया था।

माल्या के लिए यह दूसरा बड़ा झटका है। पहले लंदन की एक अदालत ने उसे भारत प्रत्यर्पण करने का आदेश दिया था, जो वहां की सरकार के पास पड़ा है। माल्या के बाद अब कोई संदेह नहीं रह गया है कि भारतीय बैंकों की रकम हड़पकर भाग गए अन्य आर्थिक अपराधियों के खिलाफ भी ऐसे फैसले सामने आएंगे। माल्या का फैसला अन्य भगोड़ों के लिए एक सख्त संदेश है। स्पष्ट है कि आर्थिक अपराधों पर नकेल कसने और बैंकों की रकम लेकर विदेश भाग जाने वालों के खिलाफ यह नया कानून कारगर साबित हो रहा है। विजय माल्या को भगोड़ा घोषित किया जाना मोदी सरकार के लिए एक बड़ी राहत की बात है। क्योंकि विपक्षी दल और विशेषकर कांग्र्रेस सरकार पर यह आरोप लगाने में जुटी थी

कि उसने माल्या को भगाने में मदद की थी। माल्या के साथ-साथ ही नीरव मोदी और मेहुल चोकसी का नाम लेकर भी सरकार पर ताने कसे जा रहे थे। लेकिन यहां कांग्र्रेस को यह नहीं भूलना चाहिए कि इन भगोड़ों को यूपीए शासनकाल में ही बैंकों से उन्हें भारी भरकम कर्ज मनमाने तरीके से दिए गए थे। ऐसे दो-तीन लोग ही नहीं, बल्कि कई लोगों को मनमाने तरीके कर्ज बांटे गए, जो आखिर बैंकों के लिए मुसीबत बन गए। इनमें से कई ऐसे भी लोग पाए गए जो कर्ज पाने के योग्य भी नहीं थे। अगर सरकार कर्ज बांटने में सावधानी बरतती तो बैंकों के सामने बड़ा संकट खड़ा नहीं होता। ऐसी चूक पिछली सरकार से हुई तो मोदी सरकार भी चूक के मामले में पीछे नहीं हट सकती।

माल्या, मोदी और चोकसी आदि सरकार व सरकारी एजेंसियों की आंखों में मिर्च डालकर भागने में कामयाब हो गए। माल्या पर तो आर्थिक अपराध के कई मामले चल रहे हैं, जो सरकार की निगरानी में थे। इनमें किंगफिशर एअरलाइंस के लिए बैंकों से लिए गए कर्जों को वापस न करना और उसे दूसरे कामों में स्थानांतरित करना शामिल है। इसके साथ हवाला के जरिए धन विदेश भेजना, कर वंचना, शेयरों की हेराफेरी जैसे गंभीर मामले उस पर होते हुए भी एजेंसियां सतर्क नहीं रही। एजेंसियों को अंदाज हो जाना चाहिए था कि ऐसी हेराफेरी करने वाले लोग भागने की तैयारी ही करते होते हैं।

अब जाकर प्रवर्तन निदेशालय, सीबीआई व आयकर विभाग एक साथ सक्रियता दिखा रहे हैं। बहरहाल, भगोड़ों के मामलों में विशेषकर माल्या के मामले में व्यावहारिक रूख नहीं अपनाया और न ही बैंकों ने इसका परिचय दिया। माल्या लंदन भागने से पहले भी बैंकों को मूल धन लौटाने की पैरवी कर चुका था। सरकार और बैंकों को मोलभाव की प्रक्रिया अपनानी चाहिए थी। इससे काफी रकम की वसूली संभव हो सकती थी। बहरहाल, अब नए एक्ट के तहत कार्रवाई की जाएगी तो भगोड़ों को सबक मिलेगा।

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