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संपादकीय

जहरीली शराब

Monday, February 11, 2019 10:05 AM

जहरीली शराब

उत्तर प्रदेश और उत्तराखण्ड की सीमा पर अनेक गांवों में जहरीली शराब ने ऐसा कहर ढाया है कि उसके सेवन से अब तक 104 लोगों की मौत हो गई है और सौ से अधिक लोगों की हालत अभी गंभीर बनी हुई है। सबसे अधिक मरने वालों में अकेले सहारपुर के 48 लोग हैं। उत्तर प्रदेश सरकार का कहना है कि जहरीली शराब से मरने वाले ज्यादातर लोग वे हैं, जो उत्तराखण्ड में एक तेहरवीं संस्कार में शरीक होने गए थे और उन्होंने वहीं शराब का सेवन किया। जहरीली शराब का मामला सामने आने के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने लापरवाही बरतने के आरोप में कई पुलिस कर्मियों और आबकारी विभाग के तीन इंस्पेक्टरों को निलंबित कर दिया है और शराब का काला धंधा करने वालों की धरपकड़ का अभियान तेज कर दिया है।

अभियान में 50 लाख रुपये की शराब सहित दो लोगों को गिरफ्तार किया है। हर ऐसी लापरवाही की घटना के बाद जांच, तलाशी व छापामारी सरकार की सामान्य प्रक्रिया है, लेकिन जो परिवार इन मौतों से उजड़ गए हैं, उनके हाथ कुछ लगने वाला नहीं है। जहरीली शराब के इस कहर की घटना से एक बार फिर यह जाहिर हो गया है कि सरकारें व प्रशासन किस हद तक लापरवाही बरतता है और कानून का पालन कराने में कितना असक्षम है। राजनीतिक और प्रशासनिक व्यवस्था में व्याप्त भ्रष्टाचार ही ऐसी समस्याओं को बढ़ाने में सहायक होता है। जितने भी गैर कानूनी काम होते हैं उनके पीछे कहीं न कहीं राजनीतिक क्षमता का संरक्षण दिखाई देता है।

कई जगह तो प्रशासनिक मिलीभगत अवैध धंधों का कारण बनी हुई है। शराब बिक्री से अपना खजाना भरने वाली सरकारों को मिलावटी व जहरीली शराब के अवैध कारोबार पर कड़ी निगरानी रखनी चाहिए, लेकिन जहरीली शराब के गोरखधंधे का इतने बड़े पैमाने पर पर्दाफाश होने के बाद अब कड़ी कार्रवाई की बातें की जा रही हैं। यदि उत्तर प्रदेश की सरकार व प्रशासन ने इस अवैध कारोबार के खिलाफ शुरू से ही सख्ती बरती होती तो इतनी बड़ी घटना घटती भी नहीं। घटना सामने आने के बाद बरती जा रही सख्ती और सक्रियता भी इस बात की क्या गारंटी दे सकती है कि यह अवैध कारोबार खत्म हो जाएगा? जहरीली शराब माफिया एकाएक खड़ा नहीं हुआ है, यह गोरखधंधा सालों से चल रहा है।

जिन इलाकों में जहरीली शराब ने कहर ढाया है, उन्हीं इलाकों में कोई दस साल पहले भी करीब पचास लोग जहरीली शराब पीकर मर गए थे। जहरीली शराब पीने वाले लोग गरीब तबके ही होते हैं तो इसका मतलब यह नहीं कि वे इस तरह मरते ही रहें। सवाल है कि दस साल पहले प्रशासन ने सबक क्यों नहीं लिया? करीब आठ महीने पहले ही कानपुर में जहरीली शराब पीने से एक दर्जन लोगों की मौत की खबर आई थी, उसके बाद भी महकमे के लोग सोते रहे और सरकार ने भी कोई सक्रियता नहीं दिखाई। जाहिर है कि उत्तर प्रदेश में मिलावटी शराब का धंधा बिना किसी रोक-टोक के चलता रहता है। इस अवैध कारोबार से पड़ोसी राज्य उत्तराखण्ड भी वंचित नहीं है।

अवैध शराब के कारोबार में कोई रोक न लगने की वजह राजनीतिक एवं प्रशासनिक इच्छाशक्ति की कमी है। उत्तर प्रदेश व उत्तराखण्ड ही नहीं अन्य राज्यों में भी अवैध शराब का कारोबार चलता रहता है। यही कारण है कि देश के किसी न किसी हिस्से से जहरीली शराब से मौतों की खबरें आती रहती हैं। जहां मौतें अधिक होती हैं वहां की बड़ी खबर बन जाती है। अवैध शराब माफियाओं पर पूर्ण रोक के लिए कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए।

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