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संपादकीय

मोदी बनाम ममता

Tuesday, February 05, 2019 10:10 AM

नरेन्द्र मोदी और ममता बनर्जी (फाइल फोटो)

सारदा चिटफंड घोटाले की गायब फाइलें जब्त करने व जांच में असहयोग कर रहे पश्चिम बंगाल के कोलकाता पुलिस कमिश्नर राजीव कुमार से पूछताछ करने उनके निवास पर पहुंची सीबीआई टीम और पुलिस के बीच रविवार की शाम को टकराव पैदा हो गया। दोनों के अफसरों के बीच धक्का-मुक्की और हाथापाई तक हो गई। इसी बीच पुलिस ने सीबीआई के ड्राइवर और पांच अफसरों को हिरासत में ले लिया गया। हालांकि तीन घंटे बाद उन्हें छोड़ दिया गया। दो एजेंसियों के बीच ऐतिहासिक तकरार के बीच पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भी पुलिस कमिश्नर कुमार के घर पहुंच गई।

इसके बाद ममता ने मीडिया के सामने मोदी सरकार पर राज्य में तख्ता पलट का आरोप लगाते हुए कोलकाता मेट्रो स्टेशन के बाहर कुर्सी लगाकर धरने पर बैठ गई। पं.बंगाल सरकार के रवैये के खिलाफ सीबीआई यह मामला लेकर सोमवार को सुप्रीम कोर्ट गई है। सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई को पुलिस कमिश्नर राजीव कुमार के खिलाफ सबूत लेकर मंगलवार को आए।

अदालत में मंगलवार को सुनवाई होगी। पश्चिम बंगाल से लेकर ओडिशा तक फैले सारदा चिटफंड घोटाले की जांच सुप्रीम कोर्ट ने 2014 में सीबीआई को सौंपी थी। करीब 2500 करोड़ रुपये के इस घोटाले के आरोपितों के तृणमूल कांग्र्रेस नेताओं से संबंध रहे हैं। इसके साथ ही रोज वैली घोटाले की जांच भी सीबीआई कर रही है, जो 1700 करोड़ रुपये का है। दरअसल, पिछले दो साल से ममता बनर्जी व मोदी के बीच तनातनी चल रही है। भाजपा नेताओं को पश्चिम बंगाल में चुनाव प्रचार करने से रोका जा रहा है।

पहले भाजपा अध्यक्ष अमित शाह की रैलियों को रोका गया तो ताजा घटनाक्रम में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के हेलीकॉप्टर को नहीं उतरने दिया गया। योगी बालूरघाट में भाजपा की रैली को संबोधित करने जाना था। पश्चिम बंगाल में वर्तमान में जो कुछ भी हो रहा है, उससे संवैधानिक संकट खड़ा हो गया है, साथ ही अराजकता का माहौल पैदा हो रहा है। तृणमूल के कार्यकर्ता सीबीआई की कार्रवाई के खिलाफ प्रदर्शन आदि कर रहे हैं। किसी राज्य सरकार की ओर से विरोधी दल के नेताओं को अपने यहां सभा सम्मेलन करने से रोकने और सीबीआई अधिकारियों को गिरफ्तार करन आदि के दुर्लभ उदाहरण हैं। ममता बनर्जी सालों से नकारात्मक राजनीति करती जा रही हैं।

यह माना कि सीबीआई अधिकारियों को राज्य सरकार की अनुमति लेकर या सुप्रीम कोर्ट की अनुमति लेकर पुलिस कमिश्नर से पूछताछ की कार्रवाई करनी चाहिए थी। क्योंकि पश्चिम बंगाल सरकार ने दिल्ली पुलिस एस्टैब्लिसमेंट एक्ट के तहत सीबीआई को दी गई मान्यता वापस ले रखी है। लेकिन सीबीआई अफसरों को हिरासत में लेना भी अनुचित है। अब सीबीआई जांच के मामले में आगे क्या करती है और सुप्रीम कोर्ट मंगलवार को क्या निर्देश देता है, लेकिन केन्द्र और राज्य के बीच यह टकराव कतई उचित नहीं है और ममता बनर्जी ने जो कुछ भी किया है या कर रही है, उससे उनकी छवि पर भी सवाल खड़े होंगे।

आखिर ममता बनर्जी देश के एक राज्य की मुखिया है तो उन्हें लोकतांत्रिक मूल्यों व मर्यादाओं को ध्यान में रखना होगा। ममता बनर्जी गुस्सैल नेता मानी जाती है, लेकिन गुस्सा उनका स्वभाव हो सकता है, लेकिन राजनीतिक विरोधियों के प्रति दुर्भाव व गुस्सा वाला रवैया शोभा नहीं देता। इस तरह का रवैया लोकतांत्रिक परम्पराओं के विपरीत है। इससे केवल पश्चिम बंगाल ही नहीं, बल्कि देश की लोकतांत्रिक छवि को भी चोट पहुंचती है। ममता बनर्जी हर प्रकार से संघीय ढांचे की मूल भावना पर ही प्रहार कर रही है।

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