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संपादकीय

घटी ब्याज दर

Saturday, February 09, 2019 09:45 AM

अंतरिम बजट में कर के मामले में आम लोगों को मिली राहत के बाद अब भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने भी आम लोगों के लिए सस्ते कर्ज का रास्ता खोल दिया है। इस वर्ष की अपनी पहली मौद्रिक समीक्षा करते हुए आरबीआई के नए गवर्नर शशिकांत दास की अध्यक्षता में मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) ने मुद्रा स्फीति में कमी को ध्यान में रखते हुए बहुमत के आधार पर नीतिगत ब्याज दर यानी रेपोरेट को 0.25 फीसदी घटाकर 6.25 फीसदी करने का फैसला लिया। रेपो दर वह दर है, जिस पर रिजर्व बैंक कारोबारी बैंकों को नकद धन उपलब्ध कराता है।

इस दर के कम होने से बैंकों के लिए धन सस्ता होगा और वे मकान, वाहन व अन्य निजी वस्तुओं की खरीद व उद्योग धंधे के लिए कर्ज सस्ता कर सकते हैं। ऐसा राहत का भी फैसला डेढ़ साल बाद सामने आया है। इस फैसले के बाद न केवल कर्ज सस्ता होगा, बल्कि आवास और वाहन के कर्ज की किस्तें भी सस्ती होंगी। शीर्ष बैंक के इस कदम पर उद्योग जगत ने उत्साहवर्धक प्रतिक्रिया दी है। इससे देश में मांग को बढ़ावा मिलेगा और उत्पादन में वृद्धि होगी और आर्थिक विकास होगा। गवर्नर दास का कहना है कि यदि महंगाई दर काबू में रही, तो आने वाले महीनों में रेपो रेट में और कटौती की जाएगी। आरबीआई 2-4 अप्रैल को फिर मौद्रिक नीति की समीक्षा करेगा।

आरबीआई के इस कदम से लगने लगा है कि आखिरकार बैंक और केन्द्र सरकार अर्थव्यवस्था को लेकर एक दिशा में सोच रहे हैं। आरबीआई ने मौद्रिक नीति की समीक्षा के वक्त किसानों का भी ध्यान रखते हुए उन्हें 1.6 लाख रुपए तक का कर्ज बिना किसी गारंटी के देना तय किया है। इस कर्ज के लिए किसी प्रकार की जमानत की जरूरत नहीं होगी। अभी तक यह सीमा एक लाख रुपए तक सीमित थी। साथ ही किसानों को लंबी अवधि के लिए कर्ज देने पर व कृषि कर्ज की अन्य दिक्कतों को दूर करने के लिए एक आंतरिक कार्य दल का गठन किया है। पिछले दिनों संसद में पेश अंतरिम बजट में पीएम किसान योजना के तहत पांच एकड़ से कम जमीन वाले हर छोटे व सीमांत किसान को छह हजार रुपए सालाना देने का एलान किया गया था।

रियल एस्टेट और आटोमोबाइल उद्योग के साथ-साथ आरबीआई का यह कदम केन्द्र सरकार को भी पसंद आएगा क्योंकि जब वह चुनाव की तैयारी में है तब बैंक आवास और वाहन लोन की दरें घटाने का काम करेंगे। रिजर्व बैंक ने ब्याज दरों में कटौती का कदम ऐसे वक्त उठाया है जब महंगाई दरें काबू में हैं। जनवरी से मार्च तक खुदरा महंगाई दर 2.4 प्रतिशत तक आंकी गई है और अप्रैल से सितम्बर के बीच इसके 3.4 प्रतिशत तक रहने का अनुमान है। इससे पहले रिजर्व बैंक महंगाई की दरों की वजह से ही ब्याज दरों में कटौती का साहस नहीं जुटा पा रहा था। सरकार चाहती थी कि ब्याज दरों में कटौती की जाए, लेकिन बैंक तैयार नहीं हो पाता था। 

इसी वजह से बैंक व सरकार के बीच टकराव की स्थिति बनी रहती थी। इस बार भी एमपीसी के दो सदस्यों विरल आचार्य और चेतन घेटे ने रेपो दरें घटाए जाने के विरुद्ध मत व्यक्त किया था। सरकार से टकराव के चलते ही पूर्व गवर्नर उर्जित पटेल ने पद से इस्तीफा दिया था। उनकी जगह आए नए गवर्नर शशिकांत दास विकास को प्रमुखता दे रहे हैं। सरकार के साथ तालमेल कर कदम उठाने के संकेत दे रहे हैं, जो भविष्य के लिए शुभ संकेत हैं।

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