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Sunday 17th of February 2019
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संपादकीय

कांग्रेस का फिर एक बड़ा चुनावी वादा

Wednesday, January 30, 2019 10:25 AM

लोकसभा चुनाव से पहले कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी फ्रंट फुट पर खेलते दिख रहे हैं। विधानसभा चुनावों के दौरान कांग्र्रेस ने किसानों की कर्ज माफी का वादा किया था। तीन राज्यों- राजस्थान, मध्यप्रदेश व छत्तीसगढ़ में कांग्र्रेस की सरकारें बनीं और किसान कर्ज माफी का वादा पूरा किया गया। अब कांग्र्रेस अध्यक्ष ने ऐलान किया है कि कांग्र्रेस केन्द्र की सत्ता में आई तो देश के सभी गरीबों को ‘न्यूनतम आय की गारंटी’ दी जाएगी। कांग्र्रेस की कर्ज माफी के वादे का अंतरिम बजट में जवाब देने की तैयारी कर रही मोदी सरकार के बजट से पहले ही राहुल गांधी का यह नया दांव एक और सियासी चुनौती होगा। चुनावी विमर्श की पटरी पर कांग्र्रेस की रफ्तार धीमी करने की रणनीति के तहत मोदी सरकार ने अगड़ी जाति के गरीबों को दस फीसद सवर्ण आरक्षण का दांव खेल कर पूरे विपक्ष को चौंका दिया था।

इसके बाद शह-मात के इस खेल में राहुल ने प्रियंका गांधी का कार्ड चला और उत्तर प्रदेश में भाजपा के साथ-साथ सपा-बसपा को भी हतप्रभ कर दिया। अब जब रोजगार के मोर्चे पर चुनौतियों को देखते हुए अंतरिम बजट में किसानों के साथ युवाओं को साधे जाने की सरकार की तैयारियों की चर्चाएं हैं, तब राहुल गांधी ने न्यूनतम आमदनी गारंटी का बड़ा वादा कर चुनावी एजेण्डा तय करने में पीछे नहीं रहने के इरादे को स्पष्ट कर दिया है। उन्होंने हाल ही में रायपुर की एक रैली में आमदनी गारंटी योजना का ऐलान करते हुए कहा कि यह वादा कोई भावी योजना मात्र नहीं है, बल्कि मेरा स्पष्ट फैसला है, जो दुनिया की किसी भी सरकार ने नहीं लिया है।

राहुल गांधी की यह घोषणा इसलिए उल्लेखनीय है, क्योंकि अभी तक वह मोदी सरकार पर किसानों की कर्ज माफी का दबाव बनाए हुए थे और साथ ही मोदी सरकार को किसान विरोधी साबित करने अभियान भी छेड़े हुए थे। लेकिन अब उन्होंने किसानों के साथ-साथ गरीबों आमदनी का मुद्दा सामने लेकर आ गए हैं। ऐसा करके कांग्र्रेस ने एक प्रकार से राजनीतिक बढ़त प्राप्त कर ली है। अब मोदी सरकार के आगामी बजट में किसानों व गरीबों से संबंधित कोई राहतकारी घोषणाएं होती हैं तो कांग्र्रेस कह सकेगी कि यह सब हमारे दबाव का नतीजा है।

इसका यह अर्थ भी नहीं कि मोदी सरकार अपनी तय घोषणाओं को रोक देगी, लेकिन उनका श्रेय कांग्र्रेस लेने की भी कोशिश करेगी। बहरहाल, कांग्र्रेस अब लोकसभा चुनाव प्रचार में किसानों, गरीबों, बेरोजगारी व राफेल सौदे को केन्द्र में रखेगी। तीन राज्यों की जीत से कांग्र्रेस काफी उत्साहित है, लेकिन लोकसभा चुनाव में जीत की राह इतनी आसान भी नहीं होगी। देश के अधिकांश राज्यों में क्षेत्रीय दलों ने अपनी जड़े जमा रखी हैं। कांग्र्रेस को उनके बीच या क्षेत्रीय दलों के साथ मिलकर चुनाव मैदान में उतरना होगा। यदि केन्द्र में गठबंधन की सरकार बनती है तो किसी एक दल के चुनावी वादे को पूरा करना मुश्किल ही होगा।

कांग्र्रेस अपना एजेण्डा जो भी बनाए, लेकिन केन्द्र सरकार को भी किसानों व गरीबों के हितों का ध्यान तो रखना ही होगा। अब राहुल गांधी की आमदनी गारंटी वाली योजना को लेकर मोदी सरकार या भाजपा चाहे जैसा प्रतिकार करे लेकिन कांग्र्रेस, भाजपा या अन्य राजनीतिक दलों को यह देखना होगा कि केवल कर्ज माफी और गरीबों को आमदनी के नाम पर दो-दो हजार रुपये बांट देने से किसी का स्थाई भला होने वाला नहीं है। योजनाएं और नीतियां तो ऐसी बनें ताकि सभी वर्ग के लोग अपने आपको सक्षम बना सकें।

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