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संपादकीय

शीतलहर की मार

Monday, December 31, 2018 09:45 AM

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली सहित समूचे उत्तर भारत में पड़ रही कड़कड़ाती ठंड

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली सहित समूचे उत्तर भारत में पड़ रही कड़कड़ाती ठंड से जन-जीवन अस्त-व्यस्त हो चला है और खेतों में काम कर रहे किसानों व गरीब लोगों की मौत होने की खबरें भी आ रही हैं। किसानों को सिंचाई के लिए रात में काम करना पड़ता है और फुटपाथ पर जीवन बसर करने वालों के पास शीतलहर से बचाव के पूरे साधन नहीं हैं। दिल्ली में तेज ठंड के साथ-साथ वहां की हवा भी जहरीली बनी हुई है। उत्तर भारत के कई शहरों में न्यूनतम तापमान शून्य से नीचे तक चला गया है। हमारे देश में बढ़ी ठंड का दौर कश्मीर और हिमालयी राज्यों से शुरू होकर पंजाब, हरियाणा होता हुआ दिल्ली, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, मध्यप्रदेश, बिहार और पश्चिम बंगाल तक को अपनी चपेट में ले लेता है।

कश्मीर व हिमाचल प्रदेश में इस बार बर्फबारी हो रही है। शून्य तक गिरते तापमान की वजह से झीलें और झरने बर्फीले हो चले हैं। मौसम विभाग के अनुसार उत्तर भारत के कई इलाकों में न्यूनतम तापमान के पुराने रिकार्ड टूट रहे हैं, कोहरा यातायात को बाधित कर रहे हैं तो कई जगहों से सड़क हादसों की खबरें आ रही हैं। एक प्रकार से मौसम कहर बरपा रहा है। वैसे मौसम की ऐसी अति हमारे लिए कोई नई नहीं है। कुछ राज्य और इलाके तो ऐसे हैं, जहां के लोग ऐसे मौसम का अनुमान पहले से ही लगाकर चलते हैं। इन खास इलाकों में मौसम चाहे जैसा भी हो, लेकिन जब उसकी अति दस्तक देने लगती है तो सारी प्रशासनिक व्यवस्थाओं की अनदेखी सामने आ जाती है। मौसम ज्यादा गर्मी का हो चाहे ज्यादा बरसात और ठंड का, अव्यवस्थाएं सामने आती हैं तो प्रशासन हरकत में आने लगता है।

अभी सर्दी की अति हो रही है तो प्रशासन की भागदौड़ भी देखने को मिल सकती है। लेकिन मौसम को लेकर मौसम विभाग की भविष्यवाणी पर गौर करें, उसकी भी पोल सामने आने लगती है। ठंड के मौसम की शुरुआत में यह बताया गया कि इस बार अपेक्षाकृत सर्दी कम रहेगी। लोगों को भी भरोसा हो गया कि ग्लोबल वार्मिंग की वजह से ऐसा हो सकता है। लेकिन जैसे ही दिसम्बर ने दस्तक दी तो सर्दी ने रिकार्ड तोड़ने ही शुरू कर दिए। फिर दिसम्बर के अंतिम दिनों में बताया गया ेकि यह शीतलहर चंद दिनों की मेहमान है, जल्दी ही उत्तर-पश्चिम की हवाओं का दौर बदलेगा  और तापमान सामान्य स्थिति में आ जाएगा। लेकिन  ऐसा हुआ नहीं। दिसम्बर पूरा हो गया और नया साल शुरू होने को है। अब मौसम विभाग ने बताया है कि शीतलहर का एक दौर और शुरू हो गया है, जो जनवरी के पहले सप्ताह तक बना रहेगा।

यानी विभाग की मानें तो ठंड की अति की मार से अभी कोई राहत मिलने वाली नहीं है। राहत मिलने वाली नहीं तो यह तय है कि जन-जीवन अभी अस्त-व्यस्त ही बना रहेगा और गरीबों व साधनहीन लोगों को कहर ही भोगना होगा। क्योंकि कई राज्यों में अभी भी रैन बसेरों का अभाव बना हुआ है। जहां रैन बसेरों की व्यवस्था नहीं होती वहां अलाव जलाने के लिए लकड़ी मुहैया करवाने की व्यवस्था की जाती है, लेकिन वह भी देखने को नहीं मिल रही। रात को क्या अब तो दिनभर शीतलहर से मौसम ठंडा बना रहता है।

तेज धूप भी पूरी राहत नहीं दे पा रही है। मौसम चक्र के हिसाब से सर्दी जरूरी भी है। कुछ फसलों के लिए लाभदायक है? लेकिन शून्य तापमान फसलों के लिए भी नुकसानदायक बन जाता है। बहरहाल, भारत के हर नागरिक को मौसम की हर स्थिति से निपटने को तैयार रहना चाहिए। सरकारी सहयोग व व्यवस्थाओं से अधिक उम्मीद कष्टदायी हो सकती है। उचित होगा कि सामाजिक संगठन, धनाढ्य वर्ग के लोग बेसहारों की मदद को आगे आएं। कुछ राहत बांटे।

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