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Thursday 17th of January 2019
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सामाजिक संगठन आगे आएं, रैन बसेरों में भागीदारी निभाएं

$author    jahid hussian
फाइल फोटो

प्रदेशभर में सर्दी ने दस्तक दे दी है और इस समय कड़ाके की ठंड है। कई इलाकों में तापमान बहुत नीचे गिर गया है, जिससे लोगों की कंपकपी छूट गई है। इसी को ध्यान में रखते हुए नगर निगम प्रशासन की ओर से हर वर्ष रैन बसेरों की व्यवस्था की जाती है। लोगों को फुटपाथ पर रहने से होने वाली परेशानी से बचाने के लिए रेन बसेरों की व्यवस्था तो की जाती है, लेकिन इनमें सुविधाओं का अभाव रहता है।

इस वर्ष भी जयपुर के कई इलाकों में रैन बसेरे बनाएं गए है, लेकिन जो रैन बसेरे लगाए गए है वह काफी नहीं है, क्योंकि शहर में आने-जाने वालों का तांता लगा रहता है। इसलिए नगर निगम प्रशासन के अलावा सामाजिक संगठनों को भी इसमें भागीदारी निभानी चाहिए और लोगों के लिए प्रशासन के साथ मिलकर रेन बसरों की और अधिक व्यवस्था करनी चाहिए। रैन बसेरे बेसहारे, गरीब लोगों के लिए एक उम्मीद की तरह होते है, जिनमें रहकर वह अपनी रात गुजार सकते है। इनके सहारे वह होटलों की मंहगाई की मार से बच जाते है। वही रैन बसेरों की व्यवस्था की बात की जांए तो कड़ाके की ठंड को देखते हुए अच्छे गद्दे और रजाई की व्यवस्था होनी चाहिए।

आमतौर पर देखा जाता है कि रैन बसेरों के नाम पर केवल खानापूर्ति कर दी जाती है। उसमें दरी, हल्की रजाई-गद्दों की व्यवस्था की जाती है, जिनसे लोगों का सर्दी से बचाव नहीं हो पाता है। कई जगह तो कर्मचारी भी ड्यूटी से नदारद पाएं जाते है। लोगों की मदद के लिए सामाजिक संगठनों को नगर निगम प्रशासन के साथ मिलकर अच्छे गद्द, रजाई और कंबल की व्यवस्था करनी चाहिए। इसके अलावा नहाने के लिए भी गर्म पानी की व्यवस्था करनी चाहिए। आमतौर पर देखा जाता है कि कर्मचारियों को ड्यूटी के दौरान गर्म पानी उपलब्ध हो जाता है, लेकिन आम लोग इससे वंचित रहे जाते है। इसलिए लोगों की मदद करने के उद्देश्य से सामाजिक संगठनों और अन्य लोगों को इसमें भागीदारी निभानी चाहिए और अच्छे सुविधापूर्ण रेन बसेरों की व्यवस्था करनी चाहिए।

 

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