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Saturday 22nd of September 2018
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देश की प्रगति के लिए पुरुष बनें महिलाओं के सहभागी

$author    Khushbu Sharma

मैं महिला दिवस मे महिला सशक्तिकरण हेतु संघर्षरत जनों को अपने मंन्तव्य से अवगत कराना चाहती हूं।  मैं आँकड़ो में विश्वास नहीं करती । यह सच है कि कई महिलाएं चाहे वो राजनीति हो या व्यावसायिक स्तर या फिर प्रशासन अपनी भूमिका निभा रही हैं । मेरे विचार से पदासीन होना व सहभागी होना पर्यायवाची  नही है ।

मेरे विचार में महिला सशक्तिकरण का महती कार्य महिलाओं के उच्च स्तर पर पदासीन होने से नही बल्कि पुरुषों के साथ हर क्षेत्र में अपनी क्षमताओं के आधार पर सहभागी होने से होगा और सहभागी में कोई बड़ा या छोटा नही होता सभी समान स्तर में होते हैं।तथा पुरूष केवल सहकर्मी के रूप में नही होता बल्कि कभी पिता की भूमिका में तो कभी मित्र या भाई की भूमिका में तो कभी पति की भूमिका में सहभागी होता है। इससे महिला के सदा सनातन गुण यथा ममता, प्रेम, करुणा व दया भी जीवन्त रहेंगे।

 

आज के समय में जरुरत है कि पुरुष महिला को सम्मान, प्यार और पूरा सपोर्ट करें ताकि समाज तरक्की कर सकें और समाज में स्त्री को दोयम दर्जे का नही बिलकुल बराबर का समझा जाए। पुरुष की गलत सोच और सामाजिक बुराईयों को खत्म करने का काम तेजी से करने की जरुरत हैं। पुरुषों को समझना होगा की महिला की प्रगति से जलने की बजाय उनके सहभागी बनकर नई सोच को रोशन करें ताकि कई महिलाओं का जीवन में उजियारा ला सके और देश को विकास के एक नए मुकाम पर ला सकें।
 

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