आखिर कब तक बेटियों पर जुल्म होते रहेंगे? - Dainik Navajyoti
Dainik Navajyoti Logo
Saturday 22nd of September 2018
Home  >  Blog   >  Blog Post
ब्लॉगर मंच

आखिर कब तक बेटियों पर जुल्म होते रहेंगे?

$author    jahid hussain
कॉन्सेप्ट फोटो

एक और तो हम हमारे देश को विकास की ओर ले जा रहे है और दूसरी ओर आए दिन हमारे देश में बेटियों के साथ बर्बरता के मामले सामने आ रहे है। हाल ही में यूपी के उन्नाव और उसके बाद जम्मू-कश्मीर के कठुआ में आठ साल की मासूम बच्ची के साथ गैंगरेप करने के बाद उसकी हत्या ने पूरे देश को सकते में डाल दिया है।

यह बात हैरान करने वाली है कि दिन दहाड़े बलात्कार होता है और लोग कुछ नहीं करते है। माफ कीजिएगा करते तो है। समाज में हो रही घटनाओं का लोग बस अपना मोबाइल निकालकर उस घटना का वीडियो बनाते है। हम तकनीक का भरपूर इस्तेमाल तो कर रहे है, शायद गलत तरीके से, तकनीक ने जो हमारे हाथ में मोबाइल नाम का खिलौना थमा दिया है उसका उपयोग हम सही जगह पर नहीं कर रहे है।

सरेआम जिस जगह रेप होता है वहां उपस्थित लोगों से जब पूछा जाता है कि आपने उस समय कुछ क्यों नहीं किया? तो लोग ये कहकर अपना पल्ला झाड़ लेते है कि हम किसी तरह के पंगे में नहीं पड़ना चाहते है। इन्हीं लोगों की वजह से सड़क पर पहले होने वाली छोट-मोटी घटनाओं को लोग नजरअंदाज कर गए और रेप जैसे बड़े अपराध जो कि समाज को भी शर्मसार करते है वह आए दिन होने लग गए। यह एक आम बात सी हो गई है। पहले इस तरह की घटना सुनकर रूह कांप जाती थी, लेकिन अब लगता है यह तो आम बात है।

आए दिन हो रहे बलात्कारों से यह भी समझ में आ रहा है कि क्यों लोगों के मन में बेटी पैदा होने का भय बना हुआ है। शायद वह यह सोचते होंगे कि अगर बेटी पैदा हो गई तो उसकी रक्षा कौन करेगा। उनके मन में यह सवाल खटकता होगा और यह सवाल उठना लाजमी है क्योंकि रेप जैसी घटना बल्कि उस पीड़िता की जिंदगी बर्बाद कर देती है और उसके परिवार वालों को लोग ताने मार-मार कर खा जाते है।

सरकार एक ओर नारा देती है 'बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ' और दूसरी ओर रेप जैसी घटनाएं जो कि देश को शर्मसार करती है। वही बार-बार ऐसी घटनाओं के सामने आने पर यह लगता है कि कब तक ये जुर्म यूं ही होते रहेंगे, कब इस तरह ही घटनाओं पर लगाम लगेगी। मेरे अनुभव की बात करें तो यह जरूर कह सकता हूं कि हमारे देश का ऐसा कोई शहर नहीं है जो कि एक-दूसरे शहर से बेहतर हो।

देखा जाए तो यह कहा जा सकता है कि जब तक लोगों की मानसिकता नहीं बदलेगी तब तक चाहे कोई भी सरकार हो वह किसी भी बेटी को इस घटना का शिकार होने से नहीं बचा सकती। वहीं आज के समय की मानसिकता की बात करे तो वह यही है कि बदमाश सड़कों पर छेड़ते रहेंगे, ऐसी शर्मसार घटनाओं को अंजाम देते रहेंगे और जनता तमाशबीन बनकर यह सब देखती रहेगी।
 

Other Latest Blogs -

मेरे अटल

अटल जी अब नहीं रहे। मन नहीं मानता। अटल जी, मेरी आंखों के सामने हैं, स्थिर हैं। जो हाथ मेरी पीठ पर धौल जमाते थे, जो स्नेह से, मुस्कराते हुए मुझे अंकवार में भर लेते थे, वे स्थिर हैं।

नरेन्द्र मोदी, प्रधानमंत्री

देश की प्रगति के लिए पुरुष बनें महिलाओं के सहभागी

मैं महिला दिवस मे महिला सशक्तिकरण हेतु संघर्षरत जनों को अपने मंन्तव्य से अवगत कराना चाहती हूं।

Khushbu Sharma

दिल से करें महिलाओं का सम्मान

आज अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस है... उन महिलाओं का दिवस जिन्हें इस दिन के मायने तक नहीं मालूम... आज सुबह की ही बात है... बस यात्रा के दौरान एक महिलायात्री महिलादिवस से पूरी तरह से अनजान हाथ में पैसे लिए कंडक्टर से टिकिट लेने पहुंच गई

Neha Nirala

क्या महिलाओं के लिए समाज की सोच में आधुनिकरण आया है?

महिलाओं का सम्मान भारतीय संस्कृति में हमारे संस्कार हैं। वैदिक काल में सभी श्लोक पद्य में रचे गए हैं, जिनमें घोषा, लोपामुद्रा, अपाला, विश्ववारा, शची, सिकता, कक्षावृत्ति, पौलोमी आदि विदुषियों का भी योगदान रहा है।

Iram tasleem

हमारे राज्यपालः संवैधानिक दायित्व

हमारे देश में संघात्मक शासन व्यवस्था है। केन्द्रीय सरकार और राज्य सरकारों को जनता प्रत्यक्ष निर्वाचन से चुनती है।

प्रो. मिश्री लाल मांडोत